नालंदा. बिहार के नालंदा में मंगलवार को हुई हृदयविदारक भगदड़ की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। घटना का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भीड़ को नियंत्रित करने के बजाय श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की गई, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। इस मामले में अब तक 4 पुजारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
CCTV में खुलासा: श्रद्धालुओं पर बरसाए गए डंडे जांच अधिकारी बिमलेश कुमार द्वारा खंगाले गए फुटेज में देखा गया कि पंडा समाज के कुछ लोग कतार में खड़े श्रद्धालुओं पर डंडे चला रहे थे। पुलिस के अनुसार, यह भगदड़ प्राकृतिक नहीं बल्कि पूरी तरह से कुप्रबंधन और लापरवाही का परिणाम थी।
अवैध वसूली के लिए बनाया गया ‘कृत्रिम जाम’ दीपनगर थाना की पुलिस अधिकारी मौसमी कुमारी के आवेदन पर दर्ज FIR में मंदिर प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे हैं:
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गोपनीयता और लापरवाही: मंदिर समिति ने भारी भीड़ की सूचना पुलिस प्रशासन को नहीं दी थी।
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अवैध वसूली: आरोप है कि गर्भगृह के पास जानबूझकर अवरोध पैदा किया गया था। गिरफ्तार पुजारी पैसे लेकर लोगों को पिछले दरवाजे से दर्शन करा रहे थे, जिससे मुख्य द्वार पर दबाव बढ़ता गया।
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अवरोध निर्माण: गर्भगृह से बाहर निकलने का रास्ता संकरा कर दिया गया था ताकि दर्शन के नाम पर अवैध वसूली की जा सके।
कैसे हुई 9 लोगों की मौत? चैत्र महीने का आखिरी दिन होने के कारण मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी थी। मुख्य गेट पर एंट्री के लिए बांस और रस्सी से बैरिकेडिंग की गई थी। पुजारियों द्वारा पीछे के रास्ते से लोगों को घुसाने और मुख्य द्वार पर धक्का-मुक्की के बीच रस्सी पर दबाव बढ़ा और वह टूट गई। रस्सी टूटते ही सैकड़ों श्रद्धालु एक साथ गर्भगृह की ओर भागे, जिससे मची भगदड़ में दबकर 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई।
प्रशासनिक कार्रवाई और FIR पुलिस ने मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष सहित 20 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्रशासन अब मंदिर के वित्तीय लेन-देन और प्रबंधन ढांचे की भी जांच कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
