रिश्तों का कत्ल: गया के डुमरिया में जमीन के लिए बड़े भाई ने दिव्यांग भाई को पसुली से रेता; अस्पताल में हड़ताल और कंगाली ने तोड़ा दम, गांव में मातम

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गया. बिहार के गया (गयाजी) जिले के डुमरिया प्रखंड से रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज वारदात सामने आई है. यहाँ बोधि बीघा थाना क्षेत्र के महुडी गांव में महज चंद कट्ठा जमीन के टुकड़े के लिए एक कलयुगी बड़े भाई ने अपने ही सगे दिव्यांग (विकलांग) छोटे भाई पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया. कंगाली, अस्पताल की हड़ताल और इलाज के अभाव में तड़प-तड़प कर आखिरकार पीड़ित भाई ने दम तोड़ दिया. घटना के बाद से पूरे गांव में भारी आक्रोश और शोक का माहौल है, वहीं पुलिस हत्या का मुकदमा दर्ज कर फरार आरोपी की सरगर्मी से तलाश कर रही है.

24 कट्ठा जमीन का बंटवारा और इलाज के लिए खेत बेचने की जिद बनी वजह

ग्रामीणों और पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा खूनी खेल पैतृक संपत्ति के विवाद से जुड़ा हुआ है:

  • जमीन का गणित: मृतक की पहचान 55 वर्षीय कृष्ण भगत (कृष्णा पाल) के रूप में हुई है, जो जन्म से ही दिव्यांग थे और उनकी कोई संतान नहीं थी. उनके पिता ने वर्षों पहले गांव में 24 कट्ठा जमीन खरीदी थी. पारिवारिक सहमति के अनुसार इसमें से 16 कट्ठा जमीन कृष्ण भगत को और 8 कट्ठा जमीन उनके बड़े भाई सूरजमल पाल के हिस्से में आई थी.

  • विवाद की शुरुआत: कृष्ण भगत शारीरिक रूप से अक्षम होने के कारण तंगी में जी रहे थे. उन्होंने अपने जीवन-यापन और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों (इलाज) के लिए अपने हिस्से की 16 कट्ठा जमीन में से कुछ हिस्सा बेचने का मन बनाया था. बड़ा भाई सूरजमल इसका लगातार विरोध कर रहा था और पूरी जमीन पर खुद कब्जा जमाना चाहता था.

धारदार पसुली से किए कई वार, बहन ने बयां किया दर्द

विवाद ने 5 जून (2026) को उस वक्त हिंसक रूप ले लिया जब दोनों भाइयों के बीच इसी बात को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई:

  1. क्रूरता की हदें पार: गुस्से में पागल होकर बड़े भाई सूरजमल पाल ने घर में रखे धारदार घरेलू हथियार (पसुली) से लाचार और दिव्यांग कृष्ण भगत पर एक के बाद एक कई वार कर दिए. हमले में कृष्ण बुरी तरह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े.

  2. अक्सर मिलती थी धमकी: मृतक की रोती-बिलखती बहन मुन्नी देवी ने पुलिस को बताया कि आरोपी सूरजमल पाल अक्सर जमीन हड़पने की नीयत से कृष्ण के साथ मारपीट करता था और उसे जान से मारने की धमकी देता था. वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद आरोपी गांव छोड़कर फरार हो गया.

हड़ताल ने छीना इलाज, ग्रामीण जुटाते रह गए चंदा पर थम गईं सांसें

कृष्ण भगत की मौत केवल हमले से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की लाचारी और घोर कंगाली के कारण भी हुई, जिसने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया है:

  • अस्पताल में हड़ताल: गंभीर हालत में परिजन कृष्ण को लेकर तुरंत गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल अस्पताल पहुंचे. लेकिन परिजनों का संगीन आरोप है कि उस वक्त सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों/कर्मियों की हड़ताल चल रही थी, जिसके कारण गंभीर रूप से घायल कृष्ण को समय पर कोई समुचित या आपातकालीन इलाज नहीं मिल सका.

  • पैसे की किल्लत: मजबूरन परिजन उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए, लेकिन जेब में पैसे न होने के कारण निजी डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए. कंगाली के कारण दो दिन बाद बेबस परिवार घायल कृष्ण को वापस घर ले आया.

  • ग्रामीणों की अधूरी कोशिश: रविवार शाम को जब कृष्ण की हालत मरणासन्न हो गई, तो महुडी गांव के लोगों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए उनके इलाज के लिए आपस में चंदा (आर्थिक मदद) जुटाना शुरू किया. ग्रामीण पैसे इकट्ठा कर उन्हें दोबारा बड़े अस्पताल भेजने की तैयारी ही कर रहे थे, कि इसी बीच कृष्ण भगत ने दम तोड़ दिया.

हत्या का केस दर्ज, आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज

प्रियनन्दन आलोक (थाना प्रभारी, बोधिबिगहा): “जमीन विवाद में भाई द्वारा भाई पर जानलेवा हमला करने और इलाज के अभाव में उसकी मौत होने का मामला बेहद गंभीर है. पुलिस ने मृतक की बहन के बयान और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी बड़े भाई सूरजमल पाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं में हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है. शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है. आरोपी की धरपकड़ के लिए पुलिस की दो विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं, उसे बहुत जल्द गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.”

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