असम चुनाव: हेमंत सोरेन को रोंगोनदी और चाबुआ में सभा की अनुमति नहीं; मोबाइल से जनता को किया संबोधित, बोले- ‘दबाने से और बुलंद होगी आवाज’

झारखंड

रांची. असम विधानसभा चुनाव 2026 के चरम पर पहुँचते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. सोमवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी जनसभाएं करने की अनुमति नहीं दी गई. प्रशासन ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए सीएम के हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की इजाजत देने से इनकार कर दिया. इस घटना के बाद सीएम सोरेन ने फोन के जरिए ही जनता को संबोधित किया और विरोधियों पर तीखा हमला बोला.

कल्पना सोरेन को भी रोका गया

यह लगातार दूसरा दिन है जब झामुमो (JMM) के स्टार प्रचारकों को बाधा का सामना करना पड़ा है. इससे ठीक एक दिन पहले, गांडेय विधायक कल्पना सोरेन को भी तीन अलग-अलग स्थानों पर सभा करने की अनुमति नहीं मिली थी. हेमंत सोरेन ने इसे संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करार दिया है.

‘तीर-धनुष की ताकत को नहीं रोक पाएंगे’

सीएम ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा:

“असम की वीर और क्रांतिकारी धरती पर लोकतंत्र की आवाज को दबाने की फिर कोशिशें की गईं. क्या सच में विरोधियों को लगता है कि ऐसे षड्यंत्रों से वे तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे? इतिहास गवाह है, जब-जब आवाज दबाई गई है, वह और बुलंद होकर उभरी है.”

चाय बागान मजदूरों और आदिवासियों का मुद्दा

हेमंत सोरेन ने असम के चाय बागान में काम करने वाले लाखों शोषित और वंचित आदिवासी समाज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा:

  • मजदूरी पर प्रहार: सीएम ने कहा कि चाय बागान मजदूरों को मात्र 250 रुपये मजदूरी मिलती है, जिसमें आज के समय में ‘जहर’ भी नहीं मिलता.

  • अधिकारों की मांग: उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इन मजदूरों को न जीने के लिए छोड़ा है और न मरने के लिए. अब यह समाज जाग चुका है और अपने ST दर्जे और सम्मान की लड़ाई खुद लड़ेगा.

9 अप्रैल को वोट से हिसाब करेगी जनता

हेमंत सोरेन ने कहा कि झामुमो पहली बार असम में ‘जय भारत पार्टी’ के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहा है. उन्होंने जनता से अपील की कि आगामी 9 अप्रैल (मतदान का दिन) को अपने ऊपर हुए वर्षों के शोषण और अत्याचार का बदला ‘वोट की ताकत’ से लें. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की कुर्सी और राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर विरोधियों को प्रचार से रोकना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है.


असम चुनाव 2026: मुख्य बातें

  • मतदान की तारीख: 9 अप्रैल 2026 (एक चरण में)

  • नतीजे: 4 मई 2026

  • मुख्य मुद्दे: चाय बागान मजदूरों की मजदूरी, आदिवासियों को एसटी का दर्जा और विकास.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *