आसनसोल: पीएम मोदी की सभा से पहले ‘बस वार’; भाजपा ने टीएमसी पर लगाया डराने-धमकाने का आरोप, तृणमूल ने किया पलटवार

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आसनसोल. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार अभियान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुरुवार को होने वाली जनसभा से पहले आसनसोल में सियासी पारा चढ़ गया है. भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर सत्ता का दुरुपयोग कर पीएम की सभा में आने वाले समर्थकों को रोकने का गंभीर आरोप लगाया है. मामला कुल्टी विधानसभा क्षेत्र से बुक की गई करीब 200 बसों के निरस्त होने से जुड़ा है.

भाजपा का आरोप: ‘धमकी देकर रद्द कराई बुकिंग’

पश्चिम बर्धमान जिला भाजपा के महासचिव केशव पोद्दार ने आरोप लगाया कि कुल्टी से हजारों कार्यकर्ताओं को लाने के लिए 200 बसें बुक की गई थीं, जिन्हें टीएमसी के दबाव में रद्द कर दिया गया.

  • दबाव की राजनीति: भाजपा का दावा है कि बस मालिकों को न केवल बुकिंग रद्द करने पर मजबूर किया गया, बल्कि एडवांस राशि भी वापस करा दी गई.

  • यूनियन की धमकी: केशव पोद्दार के अनुसार, टीएमसी से जुड़े श्रमिक संगठनों ने बस मालिकों को चेतावनी दी थी कि यदि उन्होंने भाजपा समर्थकों को ढोया, तो उनके वाहनों को भविष्य में चलने नहीं दिया जाएगा. उन्होंने इसे ‘प्रतिहिंसा की राजनीति’ और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया.

टीएमसी की सफाई: ‘आरोप निराधार और प्रेरित’

इन आरोपों पर पलटवार करते हुए आइएनटीटीयूसी (INTTUC) आसनसोल महकमा ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता राजू अहलुवालिया ने कहा कि भाजपा के दावे पूरी तरह गलत हैं.

  • संगठनात्मक कमजोरी: अहलुवालिया ने कहा कि भाजपा अपनी जमीनी कमजोरी को छिपाने के लिए ऐसे बहाने बना रही है.

  • यूनियन का तर्क: उन्होंने तर्क दिया कि जो बसें टीएमसी समर्थित यूनियनों द्वारा संचालित हैं, वे किसी अन्य पार्टी की सभा में सेवा देने के लिए बाध्य नहीं हैं.

‘भीड़ पर नहीं पड़ेगा असर’ : भाजपा प्रत्याशी

आसनसोल उत्तर से भाजपा उम्मीदवार कृषनेन्दु मुखर्जी ने स्वीकार किया कि कुछ इलाकों में बस मालिकों को डराया गया है, लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि इससे प्रधानमंत्री की सभा पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की लोकप्रियता ही लोगों को खींच लाने के लिए काफी है और गुरुवार को सभा स्थल पर भारी जनसैलाब उमड़ेगा.

गुरुवार की सभा पर टिकी निगाहें

पश्चिम बंगाल के इस औद्योगिक बेल्ट (आसनसोल-दुर्गापुर) में पीएम मोदी की यह सभा चुनावी दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अब देखना यह होगा कि परिवहन विवाद के बावजूद कुल्टी और आसपास के क्षेत्रों से कितनी भीड़ जुटती है और इसका असर 2026 के चुनावी परिणामों पर क्या पड़ता है.

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