गढ़वा. पत्नी को बेसहारा छोड़ना और फिर भरण-पोषण की जिम्मेदारी से भागना झारखंड के गढ़वा जिले के दो पतियों को महंगा पड़ गया. जिले की रंका थाना पुलिस ने अदालत के आदेश की अवहेलना करने वाले दो पतियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो न्यायिक आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते.
जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना पड़ा भारी
मामला रंका थाना क्षेत्र के मुंगदह और तमगेकला गांव का है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कृष्णा कुमार यादव और वीरेंद्र पासवान के रूप में हुई है. इन दोनों पर अपनी पत्नियों को घर से निकालने और उनके जीवन बसर के लिए जरूरी आर्थिक सहायता (भरण-पोषण) न देने का आरोप है.
कोर्ट के आदेश की एक साल तक की अनदेखी
पति की उपेक्षा से तंग आकर दोनों महिलाओं ने न्याय के लिए गढ़वा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
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न्यायालय का आदेश: कोर्ट ने पतियों को हर महीने एक निश्चित राशि पत्नियों को देने का निर्देश दिया था.
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लापरवाही: आदेश के बावजूद दोनों ने पिछले एक साल से एक भी रुपया नहीं दिया. वे लगातार कानूनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे थे.
पुलिस ने घर से दबोचा
रंका थाना प्रभारी रवि कुमार केसरी ने बताया कि कोर्ट के आदेश की लगातार अवहेलना की जा रही थी, जिसके बाद पुलिस ने टीम भेजकर दोनों को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
समाज और कानून का कड़ा संदेश
पुलिस की इस कार्रवाई ने समाज में एक स्पष्ट संदेश दिया है:
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जागरूकता: महिलाएं अब अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं और कानूनी लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटतीं.
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चेतावनी: विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि एक कानूनी जिम्मेदारी भी है. अदालत के आदेश को हल्के में लेना जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है.
गढ़वा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और कानून का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी.
