नोआमुंडी. झारखंड के नोआमुंडी प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों मानसिक रूप से अस्वस्थ महिलाओं की बढ़ती संख्या और उनके सड़कों पर भटकने से स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल है. मुख्य मार्ग, ओवरब्रिज और रेलवे फाटक जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में इन महिलाओं की मौजूदगी न केवल यातायात को प्रभावित कर रही है, बल्कि किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका को भी जन्म दे रही है.
सड़क और रेलवे ट्रैक के पास मंडराता खतरा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, ये महिलाएं अक्सर सड़कों के किनारे या रेलवे ट्रैक के पास सोती हुई पाई जाती हैं.
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दुर्घटना का डर: भारी वाहनों की आवाजाही वाले इस क्षेत्र में उनके अचानक सड़क पर आ जाने से जान-माल के नुकसान का खतरा हमेशा बना रहता है.
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असुरक्षित स्थान: ओवरब्रिज और रेलवे फाटक के पास उनकी मौजूदगी राहगीरों के लिए भी चिंता का विषय है.
अचानक आक्रामक व्यवहार से दहशत
ग्रामीणों ने बताया कि ये महिलाएं कभी-कभी अचानक उग्र हो जाती हैं.
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पथराव की घटनाएं: कई बार राहगीरों और गुजरते वाहनों पर पत्थर फेंकने की खबरें भी सामने आई हैं.
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असहज स्थिति: इस व्यवहार के कारण दुकानदार और सामान्य नागरिक, विशेषकर बच्चे और महिलाएं, उनसे दूरी बनाने को मजबूर हैं.
पुनर्वास और इलाज की उठ रही मांग
वर्तमान में ये महिलाएं दुकानों से भोजन मांगकर अपना गुजारा कर रही हैं, लेकिन उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए यह स्थायी समाधान नहीं है.
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प्रशासन से अपील: स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन महिलाओं को चिह्नित कर उनके उचित इलाज और सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था की जाए.
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मानवीय दृष्टिकोण: लोगों का मानना है कि यह केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि मानवता का भी है. उन्हें सही देखभाल मिले तो क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाता, तो किसी भी दिन कोई गंभीर अनहोनी हो सकती है. फिलहाल यह समस्या नोआमुंडी क्षेत्र में चर्चा और चिंता का मुख्य विषय बनी हुई है.
