गिरिडीह: कोर्ट और वकालतखाना के बीच की सड़क पर टोटो के आतंक से वकील परेशान; प्रधान न्यायाधीश से हस्तक्षेप की मांग

गिरिडीह झारखंड

गिरिडीह. सिविल कोर्ट और वकालतखाना के बीच व्यस्त सड़क को कोर्ट कार्य अवधि के दौरान यातायात मुक्त (Traffic Free) रखने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है. जिला अधिवक्ता संघ ने इस समस्या के समाधान के लिए गिरिडीह उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को पत्र लिखा है. इसी कड़ी में गुरुवार को संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मार्तण्ड प्रताप मिश्रा से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत ज्ञापन सौंपा.

जाम और दुर्घटनाओं का खतरा

संघ के महासचिव चुन्नू कांत द्वारा दिए गए आवेदन में बताया गया है कि यह मार्ग अधिवक्ताओं, लिपिकों और हजारों मुवक्किलों के आवागमन का मुख्य रास्ता है.

  • अव्यवस्था: कोर्ट समय के दौरान यहां सामान्य वाहनों, विशेषकर टोटो के बेतरतीब परिचालन से लगातार जाम लगा रहता है.

  • सुरक्षा पर सवाल: भीड़ का फायदा उठाकर जेबकतरे सक्रिय हो जाते हैं और वाहनों की चपेट में आने से बुजुर्गों व महिलाओं को चोट लगने का डर बना रहता है.

  • पुरानी मांग: संघ ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर पहले भी गुहार लगाई गई थी, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

संघ का प्रस्ताव

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि सुबह से शाम तक कोर्ट की कार्य अवधि के दौरान इस मार्ग को पूरी तरह यातायात मुक्त किया जाए. हालांकि, संघ ने मानवीय आधार पर दो छूट देने का सुझाव दिया है:

  1. सदर अस्पताल जाने वाली एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहन.

  2. जेल से आने-जाने वाले बंदी वाहन.

मौके पर मौजूद गणमान्य

ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व मंत्री सह वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रमोहन प्रसाद, अजय सिन्हा (मंटू) सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे. संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही यातायात व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो वकीलों और आम लोगों की सुरक्षा को देखते हुए आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी.

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