बिहार के भाजपा विधायक राजू सिंह को दिल्ली की कोर्ट ने ठहराया दोषी: न्यू ईयर पार्टी में हुई फायरिंग व महिला की मौत का मामला; कोर्ट ने हिरासत में लेने का दिया आदेश

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पटना. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर विधायक और पूर्व मंत्री राजू सिंह को लेकर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है. कोर्ट ने साल 2018 के एक हाई-प्रोफाइल मामले में सुनवाई करते हुए विधायक राजू सिंह को गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide) और आर्म्स एक्ट (शस्त्र अधिनियम) के तहत दोषी (Convicted) करार दिया है. दोषसिद्धि का फैसला आते ही अदालत ने राजू सिंह को तुरंत हिरासत में लेने का आदेश जारी कर दिया है.

जश्न में हुई फायरिंग और डॉक्टर अर्चना की मौत का है मामला

यह पूरा मामला करीब साढ़े सात साल पुराना है, जो दिल्ली के एक फार्महाउस में नए साल के जश्न से जुड़ा हुआ है:

  • घटना की तारीख: यह वाकया 31 दिसंबर 2018 की रात (न्यू ईयर ईव) का है.

  • हर्ष फायरिंग में गई जान: दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाना क्षेत्र में आयोजित एक न्यू ईयर पार्टी के दौरान जश्न में कथित तौर पर फायरिंग की गई थी. इस दौरान चली गोली वहां मौजूद महिला डॉक्टर अर्चना गुप्ता को जा लगी, जिससे बाद में उनकी मौत हो गई थी.

  • इन धाराओं में दोषी: कोर्ट ने गहन सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर विधायक राजू सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 (भाग 2 – गैर इरादतन हत्या) और शस्त्र अधिनियम (आर्म्स एक्ट) की धारा 30 के तहत कसूरवार पाया है.

विधायक की पूर्व MLC पत्नी समेत तीन लोग हुए बरी

एक तरफ जहाँ कोर्ट ने मुख्य आरोपी विधायक राजू सिंह को दोषी ठहराया, वहीं दूसरी तरफ इस मामले में सह-आरोपी बनाए गए उनके परिजनों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में विधायक राजू सिंह की पत्नी और पूर्व एमएलसी रेनू सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को सभी आपराधिक आरोपों से बाइज्जत बरी (Acquitted) कर दिया है.

बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं राजू सिंह, ऐसा रहा है सियासी सफर

राजू सिंह बिहार की राजनीति के एक रसूखदार और चर्चित चेहरे माने जाते हैं. उनका राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा और दलबदल से जुड़ा रहा है:

  • मंत्रिमंडल में रहे शामिल: विधायक राजू सिंह हाल ही में 26 फरवरी 2025 को बिहार की एनडीए (NDA) सरकार में मंत्री बनाए गए थे. उनके पिता भी अपने क्षेत्र की आनंदपुर खरौनी पंचायत के कई बार मुखिया रह चुके हैं.

  • दलबदल का इतिहास: राजू सिंह ने अपने करियर में कई राजनीतिक दलों का सफर तय किया है. वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अलावा जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) में भी रह चुके हैं और विभिन्न दलों के टिकट पर विधानसभा पहुंचे हैं.

  • 2015 से 2022 का सफर: साल 2015 में वह जेडीयू में शामिल हुए थे, लेकिन तब उन्हें विधानसभा चुनाव में शिकस्त झेलनी पड़ी थी. इसके बाद साल 2020 के चुनाव से ठीक पहले उन्होंने पाला बदला और मुकेश सहनी की वीआईपी (VIP) पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने. साल 2022 में वह वीआईपी के अन्य विधायकों के साथ भाजपा (BJP) में शामिल हो गए थे.

पत्नी को निर्दलीय लड़ाकर बनवाया था MLC

राजू सिंह का अपने क्षेत्र और आस-पास के जिलों में कितना मजबूत सियासी रसूख है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी पत्नी रेणु सिंह को बिहार विधान परिषद के चुनाव में निर्दलीय (Independent) उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतारा था. कड़े त्रिकोणीय मुकाबले के बावजूद उन्होंने अपनी रणनीतिक कुशलता से पत्नी रेणु सिंह को चुनाव जिताया और वे पूर्वी चंपारण सीट से एमएलसी (MLC) चुनी गई थीं.

दिल्ली की अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने और हिरासत में लिए जाने के बाद अब राजू सिंह की विधायकी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं. कानूनी जानकारों के मुताबिक, यदि इस मामले में उन्हें दो साल या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो नियमानुसार उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो सकती है.

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