गुजरात. गुजरात के राजकोट शहर से झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चार प्रवासी मजदूरों के कथित तौर पर गंभीर आर्थिक व शारीरिक शोषण का मामला प्रकाश में आया है. पीड़ित श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें पिछले करीब एक वर्ष से एक निजी कंपनी में बंधुआ मजदूरों की तरह बंधक बनाकर रखा गया था. इस दौरान उनसे बिना किसी वेतन के जबरन काम कराया गया और अपनी गाढ़ी कमाई मांगने पर उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट व गाली-गलौज की गई. वर्तमान में ये चारों मजदूर किसी तरह जान बचाकर कंपनी परिसर से भागने में सफल रहे हैं और राजकोट रेलवे स्टेशन पर शरण लिए हुए हैं. हालांकि, उनके पास न तो भोजन के पैसे हैं और न ही घर लौटने का किराया.
पीड़ितों में महिला भी शामिल; चक्रधरपुर, गोइलकेरा और हाटगम्हरिया के रहने वाले हैं मजदूर
मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के इस कथित मामले के शिकार हुए मजदूरों में पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर निवासी कार्तिक लोहार, गोइलकेरा के राधे लोहार, हाटगम्हरिया के लक्ष्मण पूर्ति और गोविंदा पूर्ति शामिल हैं. इन पीड़ितों में एक महिला श्रमिक भी है.
श्रमिकों ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उन्हें एक वर्ष पूर्व अच्छा रोजगार दिलाने के बहाने राजकोट लाया गया था. लेकिन यहां आते ही उन्हें बंधक बना लिया गया और कंपनी परिसर से बाहर जाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई. बुधवार की रात जब सुरक्षाकर्मियों की नजर हटी, तो वे किसी तरह वहां से भाग निकले.
कंपनी में कई अन्य साथियों के फंसे होने का दावा; सरकार से रेस्क्यू की मांग
रेलवे स्टेशन पर भूख-प्यास से तड़प रहे इन मजदूरों ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है:
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बड़े पैमाने पर शोषण की आशंका: मजदूरों के अनुसार, उक्त निजी कंपनी में झारखंड के कई अन्य श्रमिक अभी भी बंधक हैं. उन सभी से भी जबरन बिना पैसों के काम कराया जा रहा है और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती है.
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हेल्पलाइन और प्रशासन से गुहार: पीड़ित दल ने झारखंड सरकार, मुख्यमंत्री, पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन और श्रम विभाग से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है. उन्होंने मांग की है कि राजकोट में फंसे अन्य मजदूरों को जल्द से जल्द रेस्क्यू (मुक्त) कराया जाए और उन्हें सुरक्षित झारखंड वापस लाने के लिए ट्रेन टिकट व अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं.
मजदूरों के इन गंभीर आरोपों के बाद प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और अंतरराज्यीय श्रम कानूनों के अनुपालन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. हालांकि, इन दावों की अभी तक प्रशासनिक स्तर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड और गुजरात सरकार के श्रम विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर जांच शुरू करने की मांग की जा रही है.
