विश्व पर्यावरण दिवस पर उद्यान महाविद्यालय खूंटपानी में विशेष गोष्ठी: 37 किसानों को मिला वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण; ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हुआ वृक्षारोपण

झारखंड

पश्चिमी सिंहभूम. विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी स्थित उद्यान महाविद्यालय (Horticulture College) में किसानों के लिए एक दिवसीय जागरूकता सह प्रशिक्षण गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया. इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों को तेजी से बदलती जलवायु (क्लाइमेट चेंज), मृदा स्वास्थ्य (मिट्टी की गुणवत्ता), जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना था. इस गोष्ठी में क्षेत्र के कुदासिंगी, गोटाई एवं बिंज गांवों के कुल 37 प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.

सब्जी उत्पादन से लेकर कीट नियंत्रण तक, वैज्ञानिकों ने दिए ये खास टिप्स

तकनीकी सत्र के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक गुर सिखाए:

  • वैज्ञानिक बीज चयन: डॉ. अमित कुमार ने सब्जी फसलों के लिए सही बीज चयन की बारीकियों को समझाया. उन्होंने स्वयं परागण (Self-Pollination), पर-परागण (Cross-Pollination) और संकर (हाइब्रिड) बीजों के गुण-दोषों के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

  • एकीकृत कीट प्रबंधन: डॉ. थिरुनरायण पी. ने फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए खेत और मेड़ की साफ-सफाई पर जोर दिया. उन्होंने बिना रासायनिक दवाओं के ‘स्टिकी ट्रैप’ (Sticky Traps) के उपयोग से एफिड, जैसिड, व्हाइटफ्लाई और थ्रिप्स जैसे नुकसानदेह कीटों को नियंत्रित करने के आसान उपाय बताए.

  • जैव उर्वरक और नीमास्त्र निर्माण: डॉ. शुशांता दत्ता ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैव उर्वरकों के महत्व पर प्रकाश डाला और घर पर ही ‘नीमास्त्र’ व ‘बीजास्त्र’ तैयार करने की प्राकृितक विधि किसानों को समझाई.

  • सतत कृषि पद्धतियां: क्रॉप कॉइन टेक्नोलॉजी के प्रतिनिधि अंकित अक्षय ने जैविक खेती के मार्ग में आने वाली चुनौतियों और इसकी असीम संभावनाओं पर चर्चा करते हुए सतत कृषि पद्धतियों (Sustainable Agriculture) को अपनाने की अपील की.

प्रश्नोत्तरी सत्र रहा खास, छात्रों ने निभाई पुल की भूमिका

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और जीवंत हिस्सा इसका ‘प्रश्नोत्तरी सत्र’ (Q&A Session) रहा, जिसकी अध्यक्षता डॉ. सुदीप्ता पधान ने की. इस सत्र की खास बात यह रही कि महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने ग्रामीण किसानों और वैज्ञानिकों के बीच एक पुल का काम किया. विद्यार्थियों ने किसानों की व्यावहारिक समस्याओं और प्रश्नों को संकलित कर वैज्ञानिकों के समक्ष रखा, जिनका वैज्ञानिकों द्वारा ऑन-स्पॉट सरल समाधान सुझाया गया.

मृदा स्वास्थ्य पर चर्चा और बायो डीएपी का वितरण

इससे पूर्व कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ छात्रा वैष्वी सिंह के स्वागत भाषण से हुआ. इसके बाद वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुरभि सिन्हा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा फसल चक्र (Crop Rotation), जल संरक्षण और ड्रिप व स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों (Micro-Irrigation) की विस्तृत जानकारी साझा की.

मंच का कुशल संचालन संयुक्त रूप से नेहा कुमारी एवं वैष्वी सिंह ने किया, जबकि स्वाति कुमारी ने विश्व पर्यावरण दिवस के महत्व पर एक प्रभावशाली व्याख्यान दिया. कार्यक्रम के समापन पर डॉ. अविनाश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया. इस मौके पर उपस्थित सभी किसानों को क्रॉप कॉइन “पहले जैसा” बायो डीएपी (Bio-DAP) के पैकेट निःशुल्क वितरित किए गए. पूरे आयोजन में बैच 2023-24 के विद्यार्थियों का सराहनीय योगदान रहा.

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हुआ पौधारोपण

गोष्ठी के उपरांत, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार की अध्यक्षता में कॉलेज परिसर में एक वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया गया. इसके तहत महाविद्यालय के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ वैश्विक अभियान से जुड़कर सामूहिक रूप से औषधीय और फलदार पौधों का रोपण किया तथा पर्यावरण को हरा-भरा रखने का संकल्प लिया. साथ ही, छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पर्यावरण केंद्रित विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया.

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