गोड्डा सदर अस्पताल में बवाल: इंजेक्शन लगते ही शिक्षक की बिगड़ी तबीयत, मौत; परिजनों के आक्रोश के बाद ऑन-ड्यूटी डॉक्टर और एएनएम भागे, नगर थाना पुलिस ने संभाला मोर्चा

झारखंड

गोड्डा. गोड्डा जिला सदर अस्पताल में सोमवार की अहले सुबह इलाज के दौरान एक शिक्षक की मौत के बाद अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. आक्रोशित परिजनों ने ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों और एएनएम (नर्स) पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने और गलत इंजेक्शन लगाने का गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया. परिजनों के भारी गुस्से और बिगड़ते माहौल को भांपते हुए ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी वार्ड छोड़कर मौके से फरार हो गए. बाद में सूचना पाकर पहुंची नगर थाना पुलिस के कड़े हस्तक्षेप और समझाने-बुझाने के बाद ही मामला शांत हो सका.

6 महीने पहले ही देवघर में हुई थी शिक्षक के पद पर नियुक्ति

इस दुखद घटना के शिकार हुए मृतक की पहचान गोड्डा जिले के मेहरमा थाना क्षेत्र अंतर्गत हुलूकपुर गांव निवासी 48 वर्षीय आशुतोष कुमार निराला (पिता- नौरंगी पंडित) के रूप में हुई है:

  • नवनियुक्त शिक्षक: आशुतोष कुमार निराला देवघर जिले के मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र के एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे.

  • छह माह पूर्व जॉइनिंग: परिजनों ने बताया कि उनकी नियुक्ति महज 6 महीने पहले ही हुई थी और घर में खुशी का माहौल था. वे अपने पीछे पत्नी नीलम देवी, एक बेटे और दो बेटियों का हंसता-खेलता परिवार छोड़ गए हैं.

सीने में दर्द के बाद रात ढाई बजे मेहरमा से हुए थे रवाना

पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार की शाम को आशुतोष कुमार निराला के सीने में अचानक तेज दर्द (हार्ट अटैक के लक्षण) उठा और वे बेहोश होकर घर में ही गिर पड़े.

  1. प्राथमिक उपचार: आनन-फानन में परिजन उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मेहरमा ले गए.

  2. सदर अस्पताल रेफर: मेहरमा सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद भी जब उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और हालत नाजुक होने लगी, तो परिजन रात करीब 2:30 बजे उन्हें मेहरमा से गोड्डा सदर अस्पताल के लिए लेकर रवाना हुए.

परिजनों का संगीन आरोप: “इंजेक्शन लगाते ही थमीं सांसें”

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बताया कि वे सुबह करीब 4:00 बजे सदर अस्पताल गोड्डा पहुंचे. वहां इमरजेंसी वार्ड का दरवाजा खटखटा कर उन्होंने सो रहे चिकित्सक को जगाया.

डॉक्टर ने मरीज की जांच करने के बाद वहां मौजूद नर्स को एक इंजेक्शन लगाने का निर्देश दिया. परिजनों का सीधा आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात नर्स द्वारा जैसे ही आशुतोष को वह इंजेक्शन लगाया गया, उसके तुरंत बाद ही उनकी स्थिति सुधरने की बजाय तेजी से बिगड़ने लगी और वे तड़पने लगे. मरीज की हालत बेहद नाजुक होते देख चिकित्सकों ने उसे आनन-फानन में आईसीयू (ICU) वार्ड में शिफ्ट करने को कहा. हालांकि, परिजन जब आशुतोष को स्ट्रेचर पर लेकर आईसीयू वार्ड पहुंचे, तो वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने नब्ज टटोलकर उन्हें मृत घोषित कर दिया.

बिना पोस्टमार्टम कराए शव लेकर पैतृक गांव लौटे परिजन

शिक्षक की मौत की आधिकारिक पुष्टि होते ही परिजनों का धैर्य पूरी तरह से टूट गया. गलत इलाज और लापरवाही के कारण मौत का दावा करते हुए परिजनों ने अस्पताल में तोड़फोड़ और हंगामा शुरू कर दिया. खुद को परिजनों के गुस्से से घिरता देख और किसी अनहोनी के डर से ऑन-ड्यूटी डॉक्टर और एएनएम चुपके से अस्पताल से गायब हो गए.

इधर, अस्पताल प्रबंधन की सूचना पर नगर थाना की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची. पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों को ढांढस बंधाया और कानून सम्मत कार्रवाई का भरोसा देकर शांत कराया. पुलिस के समझाने के बाद रोते-बिलखते परिजन कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के झंझट से बचते हुए बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को अपने साथ पैतृक गांव हुलूकपुर लेकर चले गए. इस असमय मौत के बाद से पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है.

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