मणिपुर . पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और तनाव के बीच एक बेहद दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आई है. न्यूज़ एजेंसी एएनआई (ANI) के अनुसार, इम्फाल ईस्ट स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) अस्पताल की मोर्चरी (शवगृह) के बाहर बुधवार को बड़ी संख्या में आक्रोशित और शोकाकुल स्थानीय लोग जमा हुए. ये सभी लोग उन छह नगा नागरिकों के शवों को लेने पहुंचे थे, जिन्हें बीते 13 मई 2026 को लीलोन वैफेई गांव से कथित तौर पर अगवा (बंधक) कर लिया गया था. अस्पताल परिसर के बाहर उमड़ी भीड़ और संवेदनशील हालात को देखते हुए प्रशासन ने जेएनआईएमएस और उसके आस-पास के पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है, ताकि कानून-व्यवस्था न बिगड़े.
450 जवानों का 24 घंटे का मेगा सर्च ऑपरेशन; स्निफर डॉग की मदद से मिले शव
मणिपुर पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस सफलता और दर्दनाक बरामदगी की विस्तृत जानकारी साझा की है:
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संयुक्त अभियान: पुलिस के मुताबिक, लगभग 24 घंटे तक सुदूरवर्ती इलाकों में एक व्यापक और सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया.
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भारी बल की तैनाती: इस मेगा रेस्क्यू कम सर्च ऑपरेशन में मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और असम राइफल्स के करीब 450 कमांडो व जवान शामिल थे.
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तकनीकी टीम: दुर्गम जंगलों और संदिग्ध ठिकानों की खाक छानने के लिए विशेष स्निफर डॉग (खोजी कुत्ते) और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमों को भी इस अभियान में लगाया गया था. अंततः पुलिस टीम ने छह लोगों के शव बरामद कर लिए, जिनकी शिनाख्त 13 मई को अगवा किए गए नगा नागरिकों के रूप में की जा रही है. पुलिस फिलहाल कागजी और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर रही है.
14 कुकी नागरिकों की रिहाई के ठीक एक दिन बाद मिलीं लाशें
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इन शवों की बरामदगी की टाइमिंग बेहद संवेदनशील मोड़ पर हुई है. दरअसल, इस घटना से ठीक एक दिन पहले मणिपुर के सेनापति जिले में लगभग एक महीने से हथियारबंद उग्रवादी समूहों के कब्जे में बंधक बनाकर रखे गए 14 कुकी समुदाय के लोगों को सुरक्षित रिहा कराया गया था.
दो मुख्यमंत्रियों की भावुक अपील भी रही बेअसर
गौरतलब है कि कुकी समुदाय के 14 लोगों की सुरक्षित रिहाई की खबर आने के बाद पूर्वोत्तर के दो पड़ोसी राज्यों—नगालैंड और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने इस मानवीय कदम का पुरजोर स्वागत किया था. इसके साथ ही दोनों मुख्यमंत्रियों ने उग्रवादी संगठनों और स्थानीय गुटों से भावुक अपील की थी कि वे मणिपुर की शांति के लिए बंधक बनाए गए छह नगा नागरिकों को भी बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रिहा कर दें. हालांकि, उग्रवादियों पर इस राजनीतिक और सामाजिक अपील का कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने बंधकों की बेरहमी से हत्या कर दी. फिलहाल पूरे मणिपुर और विशेषकर इम्फाल ईस्ट क्षेत्र में भारी सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है.
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