हजारीबाग. हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र अंतर्गत बादम स्थित राउतपारा के समीप संचालित एक अवैध कोयला खदान में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया. यहाँ अवैध रूप से कोयला उत्खनन (माइनिंग) करने के दौरान अचानक खदान की चाल धंस गई, जिसके मलबे में दबने से एक मजदूर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए. इस वीभत्स हादसे के बाद पूरे कोयलांचल क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई है. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खदान संचालकों और कोयला माफियाओं द्वारा मामले की लीपा-पोती करने और साक्ष्य मिटाने का पुरजोर प्रयास किया जा रहा है.
सुरंगनुमा खदान में हुआ हादसा, मृतक की हुई पहचान
स्थानीय सूत्रों से मिली सटीक जानकारी के अनुसार, मृतक की शिनाख्त बादम पंचायत के राउतपारा निवासी जुगल साव के पुत्र सचिन साव (उम्र करीब 22 वर्ष) के रूप में की गई है:
-
खतरे में माइनिंग: शुक्रवार को सचिन अन्य मजदूरों के साथ जमीन के नीचे बनी असुरक्षित सुरंगनुमा खदान में कोयला काटने गया था. इसी दौरान ऊपर से टन वजनी मिट्टी और कोयले का मलबा सीधे मजदूरों पर आ गिरा.
-
चोरी-छिपे इलाज: हादसे में घायल हुए दो अन्य मजदूरों को साथियों की मदद से मलबे से बाहर निकाला गया, जिनका कानूनी पचड़े से बचने के लिए किसी अज्ञात निजी स्थान पर चोरी-छिपे इलाज कराया जा रहा है.
शव हटाने और साक्ष्य मिटाने का गंभीर आरोप, पुलिस को भनक तक नहीं!
इस संवेदनशील हादसे के बाद कोयला माफियाओं के सिंडिकेट पर बेहद संगीन आरोप लग रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार, जैसे ही सचिन साव की मौत की पुष्टि हुई, खदान संचालकों ने पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी शिकंजे से बचने के लिए आनन-फानन में मृतक के शव को घटनास्थल से हटाकर किसी गुप्त स्थान पर छुपा दिया.
आशंका जताई जा रही है कि पूर्व के मामलों की तरह ही इस बार भी प्रशासन को बिना सूचना दिए, डरा-धमकाकर या सेटिंग के जरिए शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने की साजिश रची जा रही है ताकि अवैध खनन का कोई सबूत न बचे. यही कारण है कि देर शाम तक बड़कागांव थाना पुलिस या स्थानीय प्रशासन की ओर से घटना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी.
प्रशासन पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा; वन क्षेत्रों में संचालित हैं सैकड़ों ‘मौत के मुहाने’
इस दर्दनाक हादसे के बाद बड़कागांव के ग्रामीणों में स्थानीय पुलिस और खनन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है. ग्रामीणों का सीधा दावा है कि बादम कोल परियोजना और आस-पास के दर्जनों वन व ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से बेखौफ होकर अवैध मुहानों (खदानों) के जरिए टनों कोयला निकाला जा रहा है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई न होने से माफियाओं के हौसले बुलंद हैं.
इन क्षेत्रों में सक्रिय है अवैध खनन का नेटवर्क: बड़कागांव के तिलैया, कुरहा, खपिया, इंदिरा, पसेरिया, मलडीह घाटी, कुंदरू पलांडू, गोंदलपुरा, राउतपारा, बेलवाटोंगरी, लकुरा और पंकरी बरवाडीह समेत दर्जनों इलाकों में सैकड़ों अवैध कोयला खदानें बेरोकटोक संचालित हो रही हैं. इन दुर्गम इलाकों में माफियाओं ने गहरी और खतरनाक सुरंगें बना रखी हैं, जहाँ गरीब मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर रोजाना अवैध खनन करते हैं.
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि वन विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा समय-समय पर की जाने वाली ‘डोजरिंग’ (खदानों को भरने की कार्रवाई) महज एक सरकारी कोरम पूरा करने और खानापूर्ति तक सीमित है. अगर वक्त रहते इन माफियाओं के खिलाफ सख्त मकोका या गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई होती, तो आज एक गरीब मां-बाप के इकलौते चिराग को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती. फिलहाल, पूरे मामले पर पुलिसिया तफ्तीश और खनन विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.
