हजारीबाग. झारखंड का हजारीबाग जिला परिवहन कार्यालय (DTO ऑफिस) इन दिनों सरकारी कामकाज से ज्यादा जहरीले सांपों के आतंक को लेकर शहर में कौतूहल और चर्चा का विषय बना हुआ है. कार्यालय परिसर और विशेषकर कंप्यूटर कक्ष में समय-समय पर जहरीले सांप निकलने से यहाँ कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी हर वक्त खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं. शनिवार (23 मई) को एक बार फिर कंप्यूटर रूम के ठीक पीछे उगी झाड़ियों में एक बड़ा सांप देखा गया, जिससे कर्मियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.
भगवान का नाम लेकर कंप्यूटर पर बैठते हैं कर्मी
कार्यालय के कंप्यूटर कक्ष में रोजाना आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी डिजिटल कार्यों का निपटारा करते हैं, जबकि बाहर आवेदकों की भारी भीड़ रहती है. सांपों के डर से कर्मचारियों की कार्यशैली पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है:
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दहशत का माहौल: कर्मचारी सुबह ऑफिस पहुंचने के बाद सबसे पहले अपनी टेबल, कुर्सी, कंप्यूटर सीपीयू और आलमीरा के आसपास नजर दौड़ाते हैं.
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अलर्ट मोड: पूरी तरह आश्वस्त होने और भगवान का नाम लेने के बाद ही काम शुरू होता है. काम के दौरान भी कर्मियों का ध्यान फाइलों से ज्यादा जमीन पर रेंगने वाले खतरों पर लगा रहता है.
पुराना DSE कार्यालय बना ‘भूत बंगला’, बीसीसीएल की तरह फैला कचरा
DTO ऑफिस के आगे का हिस्सा तो चकाचक और साफ रहता है, लेकिन इसके पीछे का हिस्सा सांपों का मुख्य ब्रीडिंग ग्राउंड (बसेरा) बन चुका है:
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खंडहर बनी इमारत: कार्यालय के ठीक पीछे स्थित शिक्षा विभाग का पुराना डीएसई (DSE) कार्यालय कुछ साल पहले नए समाहरणालय भवन में शिफ्ट हो चुका है. तब से यह पुरानी इमारत पूरी तरह लावारिस और ‘भूत बंगले’ में तब्दील हो चुकी है.
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झाड़ियों और कबाड़ का अंबार: इस खाली इमारत के चारों ओर कई फीट ऊंची झाड़ियां उग आई हैं और गंदगी का अंबार लगा है, जो जहरीले सांपों के छिपने के लिए सबसे मुफीद जगह है.
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दस्तावेजों का ढेर: आरटीए कार्यालय से सटा पुराना डीटीओ कार्यालय भी सालों से बंद है, जहाँ सरकारी कामकाज से जुड़े भारी-भरकम पुराने दस्तावेज सड़ रहे हैं. कर्मचारियों ने यहाँ भी कई बार सांपों को जाते देखा है.
महीनेभर पहले पकड़ा गया था कोबरा, पहले हो चुकी है एक मौत
कर्मचारियों की यह दहशत बेवजह नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक दर्दनाक इतिहास और हालिया घटनाएं हैं:
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हालिया घटना: करीब एक महीने पहले कंप्यूटर कक्ष के भीतर ही एक बेहद जहरीला सांप घुस आया था, जिसे वन विभाग या सपेरे की मदद से बमुश्किल पकड़कर जंगल में छोड़ा गया. इसके बाद से हर 7 से 10 दिनों के भीतर सांप दिखने का सिलसिला जारी है.
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पुलिसकर्मी की मौत का इतिहास: कुछ साल पहले इसी कार्यालय परिसर में अनजाने में पैर पड़ जाने के कारण एक पुलिसकर्मी (जो पदमा पुलिस पिकेट में कार्यरत थे) को सांप ने डस लिया था, जिससे उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी.
अधिकारी का दावा: साफ-सफाई और अलर्ट पर जोर
इस गंभीर और जानलेवा समस्या पर हजारीबाग के जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) बैधनाथ कामती ने बताया कि कार्यालय परिसर में बार-बार सांप निकलने की शिकायतें मिली हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पिछले कुछ दिनों में प्रभावित हिस्सों में साफ-सफाई और ब्लीचिंग/कीटनाशक दवाओं के छिड़काव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. साथ ही, सभी कर्मचारियों को अत्यधिक सतर्क और अलर्ट रहने की हिदायत दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके.
