गुमला. झारखंड के गुमला जिले के भरनो प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय के छात्रावास (हॉस्टल) से एक अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहाँ हॉस्टल में रहने वाली 10वीं कक्षा की एक 15 वर्षीय छात्रा ने कमरे के भीतर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना बुधवार की सुबह करीब 06:00 बजे की बताई जा रही है. हॉस्टल परिसर में छात्रा द्वारा आत्मघाती कदम उठाए जाने की खबर से पूरे स्कूल में हड़कंप और चीख-पुकार मच गई. सूचना मिलते ही भरनो थाना प्रभारी संतोष कुमार सिंह पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की बारीकी से तफ्तीश शुरू कर दी है.
पेट दर्द की बात कहकर कमरे में रुकी, सहेलियों ने लात मारकर खोला दरवाजा
स्कूल प्रबंधन और छात्राओं से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, इस दर्दनाक घटनाक्रम की शुरुआत सुबह की प्रार्थना और पीटी (Physical Training) के दौरान हुई:
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सहेलियों से बोला झूठ: कस्तूरबा स्कूल के इस तीन मंजिला छात्रावास में कुल 27 कमरे हैं. मृतका, जिसकी पहचान बूढ़ीपाठ गांव निवासी चैतु उरांव की 15 वर्षीय पुत्री मोनिका कुमारी के रूप में हुई है, वह दूसरी मंजिल पर स्थित कमरा नंबर 23 में अपनी 14 अन्य सहेलियों के साथ रहती थी. बुधवार की सुबह रोजाना की तरह जब सभी छात्राएं पीटी के लिए ग्राउंड पर जाने लगीं, तो मोनिका ने अपनी सहेलियों से कहा कि उसके पेट में तेज दर्द हो रहा है, इसलिए वह ग्राउंड में नहीं आ पाएगी.
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गिनती में गायब रहने पर खुली पोल: मैदान में जब वार्डन और शिक्षकों द्वारा छात्राओं की हाजिरी (गिनती) ली गई, तो मोनिका अनुपस्थित पाई गई. इस पर शिक्षिका ने उसकी सहेलियों को उसे बुलाने के लिए ऊपर कमरे में भेजा.
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दुपट्टे से लगाया फंदा: जब सहेलियां कमरा नंबर 23 के पास पहुंचीं, तो दरवाजा अंदर से पूरी तरह लॉक था. छात्राओं ने जब कुंडी खटखटाई, तो अंदर से कुछ भारी चीज गिरने की आवाज आई. अनहोनी की आशंका को देखते हुए छात्राओं ने मिलकर दरवाजे पर जोर से लात मारी, जिससे दरवाजा टूट गया. अंदर जाने पर उन्होंने देखा कि मोनिका अपने ही दुपट्टे के सहारे फंदे से लटकी हुई थी. छात्राओं ने तुरंत उसे नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी.
बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती, स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप: पिता
घटना की वज्रपात जैसी खबर मिलते ही मृतका मोनिका के माता-पिता और ग्रामीण बदहवास हालत में दौड़ते हुए स्कूल परिसर पहुंचे. अपनी हंसती-खेलती बेटी का बेजान शव देखकर माता-पिता दहाड़ मारकर रोने लगे, जिससे वहां मौजूद हर आंख नम हो गई.
मृतका के पिता चैतु उरांव ने स्कूल प्रबंधन की भूमिका और दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी मानसिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ थी और वह कभी भी आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम नहीं उठा सकती. पिता ने रोते हुए कहा, “कुछ दिन पहले ही वह घर आई थी, उसने किसी भी तरह की कोई परेशानी या तनाव की बात नहीं बताई थी. अगर उसे मामूली पेट दर्द था, तो कोई पेट दर्द के कारण फांसी क्यों लगाएगा?” परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर सुरक्षा और निगरानी में घोर लापरवाही बरतने का सीधा आरोप लगाया है.
प्रशासनिक अमला मौके पर मुस्तैद, छात्राओं से बंद कमरे में पूछताछ: SDO
कस्तूरबा स्कूल में छात्रा की मौत के बाद उपजे तनाव को देखते हुए जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी भी तुरंत भरनो पहुंचे.
मौके पर बसिया एसडीओ अखिलेश कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कविता खलखो, बीडीओ अरुण कुमार सिंह, पीपीओ सूरज लकड़ा और पीआरपी समीम एजाज ने कस्तूरबा विद्यालय का निरीक्षण किया. अधिकारियों ने हॉस्टल की सभी छात्राओं और शिक्षिकाओं के साथ एक विशेष बंद कमरे में बैठक की और घटना की सुबह मोनिका के हाव-भाव व उससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी साझा करने को कहा.
भरनो थाना पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया है. पुलिस ने बताया कि मृतका के कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. पुलिस और शिक्षा विभाग की टीम संयुक्त रूप से इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या छात्रा किसी पारिवारिक, शैक्षणिक या मानसिक तनाव से गुजर रही थी. प्रशासन ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है.
