रांची. रांची पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने मंगलवार की आधी रात को ओरमांझी स्थित ‘तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड’ (शराब निर्माण प्लांट) में एक बड़ी छापेमारी की है. यह शराब फैक्ट्री राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार के पूर्व एमएलसी (MLC) सुबोध राय की है. छापेमारी दल ने मौके से ही पूर्व एमएलसी सुबोध राय, उनके चालक देवेंद्र भगत और एक अन्य कर्मी रविकांत राय को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया है. आरोप है कि इस स्वीकृत प्लांट में तैयार की जा रही शराब पर देश के अन्य राज्यों के नामी ब्रांड्स के फर्जी लेबल (Fake Labels) लगाकर उसे अवैध रूप से तस्करी के जरिए बाजारों में आधे दामों पर खपाया जा रहा था. बुधवार की शाम सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (जेल) भेज दिया गया है.
रात 12 से सुबह 6 बजे तक चला महा-ऑपरेशन, 2 साल पहले भी सील हुआ था प्लांट
सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में चली यह कार्रवाई बेहद गोपनीय और योजनाबद्ध तरीके से की गई:
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6 घंटे चली छापेमारी: उत्पाद विभाग और पुलिस की टीम ने मंगलवार की रात ठीक 12:00 बजे फैक्ट्री को चारों तरफ से घेरकर धावा बोला. यह तलाशी अभियान बुधवार की सुबह 06:00 बजे तक लगातार जारी रहा.
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पुराना आपराधिक रिकॉर्ड: जांच में यह भी सामने आया कि इसी प्लांट में ठीक दो वर्ष पूर्व भी उत्पाद विभाग ने नियमों के उल्लंघन और अवैध गतिविधियों को लेकर छापेमारी की थी, जिसके बाद तत्कालीन प्रशासन ने इसे पूरी तरह सील कर दिया था.
यूपी-दिल्ली के फर्जी लेबल लगाकर अन्य राज्यों में तस्करी, भारी मात्रा में स्टॉक जब्त
फैक्ट्री के भीतर से ब्रांडेड कंपनियों के रैपर और बोतलें बरामद की गई हैं, जिन पर ‘फॉर सेल ओनली उत्तर प्रदेश’ और ‘फॉर सेल इन दिल्ली’ प्रिंटेड था. छापेमारी के दौरान जब्त की गई अवैध शराब और सामग्रियों का विवरण इस प्रकार है:
तस्करी के लिए बनाए गए फर्जी कागजात, उत्पाद विभाग के ‘बॉन्ड अफसर’ की भूमिका पर सवाल
इस हाई-प्रोफाइल मामले के उजागर होने के बाद खुद उत्पाद विभाग (Excise Department) की कार्यप्रणाली और आंतरिक सुरक्षा तंत्र भी गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है.
इन मुख्य नियमों और गड़बड़ियों का हुआ खुलासा:
अवैध स्टॉक व राजस्व की चोरी: लाइसेंसधारी कंपनी ने परिसर के भीतर विदेशी शराब का ऐसा भारी स्टॉक छिपाकर रखा था, जिसकी विभाग से कोई अनुमति नहीं थी. इसके जरिए झारखंड राज्य के राजस्व को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा था.
फर्जी परिवहन दस्तावेज: अन्य राज्यों (विशेषकर बिहार, जहां पूर्ण शराबबंदी है) में शराब की अवैध तस्करी के लिए बकायदा फर्जी रूट पास और नकली कागजात तैयार किए जा रहे थे.
बॉन्ड अफसर की तैनाती के बावजूद चलता रहा खेल: नियमों के मुताबिक, किसी भी डिस्टिलरी या शराब मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के भीतर उत्पादन और डिस्पैच की हर प्रक्रिया की सीधी निगरानी के लिए उत्पाद विभाग द्वारा एक ‘बॉन्ड अफसर’ (Bond Officer) की स्थाई प्रतिनियुक्ति की जाती है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि अधिकारी की मौजूदगी के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर फर्जी लेबलिंग का खेल कैसे चल रहा था?
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में खुद आरोपी सुबोध कुमार ने स्वीकार किया कि प्लांट के सभी कार्य बॉन्ड अफसर की निगरानी में ही होते थे, लेकिन जब वे अधिकारी अन्य अंचलों या विभागीय कार्यों में व्यस्त या बाहर रहते थे, तब प्लांट प्रबंधन द्वारा शराब पर अलग-अलग राज्यों के फर्जी टैग लगाकर उन्हें बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली ट्रकों के जरिए भेज दिया जाता था. उत्पाद विभाग अब संबंधित बॉन्ड अधिकारी की संलिप्तता की भी विभागीय जांच कर रहा है.
