झारखंड में सुरक्षा बलों को ऐतिहासिक सफलता: 1 करोड़ का इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा दो सहयोगियों के साथ गिरफ्तार; सरेंडर बॉडीगार्ड की निशानदेही पर हुई कार्रवाई

धनबाद

रांची. झारखंड में सुरक्षा बलों और पुलिस ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल करते हुए कुख्यात माओवादी संगठन का किला ध्वस्त कर दिया है. मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में 16 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के तुरंत बाद देर रात संयुक्त अभियान में 1 करोड़ रुपये के इनामी, माओवादियों की सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो के सदस्य मिसिर बेसरा को दो अन्य सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया.

यह बड़ी कामयाबी धनबाद और गिरिडीह के सीमावर्ती इलाके से मिली. पुलिस, सीआरपीएफ (CRPF) और कोबरा (CoBRA) बटालियन ने यह संयुक्त ऑपरेशन चलाया.

सरेंडर बॉडीगार्ड ‘शनिचरवा’ की सूचना पर हुई गिरफ्तारी

मंगलवार दिन में पुलिस मुख्यालय में जिन 16 नक्सलियों ने सरेंडर किया था, उनमें मिसिर बेसरा का बॉडीगार्ड और सुरक्षा कवच माना जाने वाला ‘शनिचरवा’ भी शामिल था. उसी की सटीक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने देर रात जंगलों में घेराबंदी कर मिसिर बेसरा और उसके साथियों को दबोच लिया.

25 लाख के इनामी ‘मोछू’ समेत दो सहयोगी गिरफ्तार

सुरक्षा बलों ने मिसिर बेसरा के साथ जिन दो अन्य सक्रिय माओवादियों को गिरफ्तार किया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण उर्फ कुंबा मुर्मू: इस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह स्पेशल एरिया कमांडर (SAC) है (मूल निवासी- घोड़ाबांधा, बरवाअड्डा, धनबाद).

  • गौरव उर्फ सौरभ: संगठन का सक्रिय सदस्य.

सुरक्षा एजेंसियां तीनों को किसी अज्ञात/गुप्त स्थान पर रखकर गहन पूछताछ कर रही हैं. इसके अलावा दो ग्रामीणों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है. अब राज्य में केवल सेंट्रल कमेटी मेंबर असीम मंडल और उसके पांच सहयोगी ही सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बचे हैं.

2007 में खूंटी से हुआ था गिरफ्तार, 2009 में लखीसराय से भागा था

गिरिडीह के पीरटांड़ का रहने वाला और धनबाद के कॉलेज से हिंदी में स्नातक (Graduate) मिसिर बेसरा 1980 के दशक के अंत में नक्सली संगठन में शामिल हुआ था.

  • 154 मामले दर्ज: उस पर झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कुल 154 आपराधिक मामले और NIA के 3 केस दर्ज हैं.

  • हिरासत से फरार: सितंबर 2007 में खूंटी से गिरफ्तारी के बाद, वर्ष 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट ले जाने के दौरान वह माओवादी हमले की मदद से पुलिस हिरासत से फरार हो गया था.

मिसिर बेसरा पर दर्ज प्रमुख वारदातें और आपराधिक इतिहास

  • पूर्व विधायक पर हमला: 2022 में पश्चिम सिंहभूम में पूर्व विधायक गुरुचरण नायक पर जानलेवा हमला और उनके दो बॉडीगार्ड्स की हत्या की साजिश (NIA जांच जारी).

  • जहानाबाद जेल ब्रेक: 2005 के कुख्यात जहानाबाद जेल ब्रेक कांड की मुख्य साजिश, जिसमें 389 कैदी फरार हुए थे.

  • सुरक्षा बलों पर हमले: 2001 में हजारीबाग सीआरपीएफ कैंप (12 जवान शहीद) और धनबाद जैप (JAP) कैंप (13 जवान शहीद) पर हमले का मुख्य आरोपी.

  • लेवी सिंडिकेट और IED: कोल्हान और सारंडा के जंगलों में आईईडी (IED) ब्लास्ट कराने और ठेकेदारों व कारोबारियों से करोड़ों रुपये की लेवी (रंगदारी) वसूलने का सिंडिकेट चलाने का आरोप.

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