सरायकेला. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुए व्यवहार को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला है. सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सिलीगुड़ी की घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अक्षम्य बताया. चंपाई सोरेन ने कहा कि यह केवल एक पद का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, मातृशक्ति और पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता का अपमान है. उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर प्रोटोकॉल तोड़ा गया और देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति के स्वागत में न तो कोई बैनर लगाया गया और न ही मुख्यमंत्री या कोई कैबिनेट मंत्री मौजूद रहा.
पूर्व सीएम ने पिछले वर्ष की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि झाड़ग्राम के पाटा बिंदा मेला में भी उनके कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी गई थी, जिससे राज्य सरकार का आदिवासी विरोधी चेहरा पहले ही साफ हो गया था. उन्होंने कहा कि ओल चिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति के कार्यक्रम में बाधा डालना और स्थल बदलना बेहद आपत्तिजनक है. चंपाई सोरेन ने केंद्र सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की और कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान के लिए वहां राष्ट्रपति शासन लगाने पर विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज अपनी अस्मिता के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा.
