संसाधनों की कमी को बनाया ताकत: दुमका के किसान पुत्र दिवेश कुमार ने JEE एडवांस में लहराया परचम; रोजाना 13 घंटे पढ़ाई कर SC कैटेगरी में हासिल की 354वीं रैंक

झारखंड

दुमका. देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक ‘आईआईटी जेईई एडवांस 2026’ (JEE Advanced 2026) का परिणाम घोषित होते ही झारखंड के उपराजधानी दुमका में जश्न का माहौल है. जिले के सरैयाहाट प्रखंड अंतर्गत सुदूर बरमानियां गांव के एक अत्यंत साधारण किसान परिवार के होनहार बेटे दिवेश कुमार ने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और कड़े अनुशासन की बदौलत इस परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है. दिवेश ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) में करीब 13,100 वां स्थान प्राप्त किया है, जबकि अनुसूचित जाति (SC Category) में देश भर में 354वीं रैंक हासिल कर पूरे संथाल परगना क्षेत्र का नाम रोशन किया है.

जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र रहे हैं दिवेश, बंगलौर से की इंटर की पढ़ाई

ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े दिवेश की प्रतिभा को निखारने में नवोदय विद्यालय का बड़ा योगदान रहा है:

  • मैट्रिक तक की सफर: दिवेश कुमार ने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा और मैट्रिक (10वीं) की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, हंसडीहा (दुमका) से पूरी की.

  • इंटर के लिए गए बंगलौर: उनकी कुशाग्र बुद्धि को देखते हुए आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय, बंगलौर भेजा गया, जहां से उन्होंने इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा उत्तीर्ण की और साथ ही इंजीनियरिंग की तैयारी को धार दी.

सोशल मीडिया से बनाई दूरी, प्रतिदिन करते थे 13 से 14 घंटे कठिन तपस्या

दिवेश की यह ऐतिहासिक सफलता किसी चमत्कार का परिणाम नहीं, बल्कि उनकी निरंतर तपस्या का फल है. पारिवारिक सूत्रों के अनुसार:

  1. कड़ा टाइम टेबल: परीक्षा की तैयारी के दौरान दिवेश बाहरी दुनिया को भूलकर प्रतिदिन नियमित रूप से 13 से 14 घंटे तक गहन अध्ययन (Self Study) करते थे.

  2. डिजिटल डिटॉक्स: उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान भटकने से रोकने के लिए सोशल मीडिया, स्मार्टफोन के फालतू ऐप्स और अन्य व्यर्थ के मनोरंजन के साधनों से पूरी तरह दूरी बना ली थी.

किसान पिता के त्याग और समर्पण ने दी आगे बढ़ने की प्रेरणा

दिवेश के पिता संजय दास एक साधारण किसान हैं जो खेती-बारी कर घर चलाते हैं, वहीं मां चंदा देवी कुशल गृहणी हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति कभी बहुत मजबूत नहीं रही और कई बार तंगहाली का भी सामना करना पड़ा. इसके बावजूद:

  • पिता ने नहीं माना हार: पिता संजय दास ने तंगहाली को कभी बेटे की पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया और हर संभव परिस्थिति में उसका हौसला बढ़ाया.

  • मां का मिला आशीर्वाद: माता-पिता के इसी त्याग और लगातार दिए गए प्रोत्साहन ने दो भाइयों में से एक, दिवेश को देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों (IIT) के दरवाजे तक पहुंचा दिया. इस सफलता से पूरे घर में दिवाली जैसा माहौल है.

क्षेत्र के अन्य ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए रोल मॉडल बने दिवेश

दिवेश कुमार की इस अभूतपूर्व सफलता पर बरमानियां गांव के ग्रामीणों, उनके पुराने शिक्षकों और शुभचिंतकों ने उनके घर पहुंचकर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है.

स्थानीय प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि दिवेश की यह कामयाबी दुमका और झारखंड के अन्य ग्रामीण इलाकों के उन हजारों विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगी, जो आर्थिक तंगी या संसाधनों के अभाव के कारण अपने सपनों का गला घोंट देते हैं. दिवेश ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो विपरीत परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं.

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