रांची में उमड़ा आस्था का सैलाब: 1.5 लाख भक्तों ने खींचा भगवान जगन्नाथ का रथ, 10 साल में पहली बार सुखी रही रथ यात्रा; सीएम ने की तोरण द्वार की घोषणा

झारखंड रांची

रांची. राजधानी रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर में गुरुवार (16 जुलाई 2026) को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने मुख्य मंदिर से बाहर निकलकर भक्तों के बीच पहुंचे. करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने भक्ति और उत्साह के साथ भगवान के रथ की डोर थामी. गगनभेदी जयकारों के बीच दो घंटे के भीतर रथ को मुख्य मंदिर से मौसीबाड़ी पहुंचाया गया. इस वर्ष की रथ यात्रा में सबसे अनोखी बात यह रही कि पूरे आयोजन के दौरान बारिश की एक बूंद भी नहीं बरसी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथ यात्रा के दिन बारिश को बेहद शुभ और अच्छी खेती का सूचक माना जाता है, लेकिन इस बार मौसम शुष्क रहा.

पिछले 10 वर्षों में पहली बार नहीं बरसे बदरा

मौसम विभाग द्वारा पूर्व में अलर्ट जारी किए जाने के बावजूद इस बार बारिश नहीं हुई. रांची के पिछले 10 वर्षों के मौसम रिकॉर्ड को देखें तो यह पहला मौका है जब रथ यात्रा का दिन पूरी तरह सूखा रहा:

  • 2026 (16 जुलाई): मौसम विभाग के अलर्ट के बाद भी बारिश शून्य रही.

  • 2025-2022: इन वर्षों में छिटपुट फुहारों से लेकर 15 मिमी तक बारिश दर्ज की गई थी.

  • 2021 और 2020: कोरोना महामारी के कारण रथ यात्रा नहीं निकल सकी थी, लेकिन इन वर्षों में क्रमशः 71 मिमी और 50 मिमी की भारी बारिश हुई थी.

  • 2019-2017: इन सालों में भी दोपहर या देर शाम को हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की गई थी.

335 साल पुराना इतिहास, केवल कोरोना काल में रुकी थी यात्रा

रांची के जगन्नाथपुर मंदिर की रथ यात्रा का इतिहास 335 वर्ष पुराना है. इस भव्य परंपरा की शुरुआत वर्ष 1691 में नागवंशी शासक अनिनाथ शाहदेव ने पुरी के विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर से प्रेरित होकर की थी. इस मंदिर की स्थापत्य शैली और तमाम धार्मिक रीति-रिवाज हूबहू पुरी मंदिर जैसे ही हैं. 335 वर्षों के इस लंबे इतिहास में केवल दो बार (वर्ष 2020 और 2021 में) वैश्विक कोरोना महामारी के चलते रथ यात्रा को स्थगित करना पड़ा था, तब केवल मंदिर के गर्भगृह में ही रस्म अदायगी की गई थी.

सीएम हेमंत सोरेन की बड़ी घोषणा; राज्यपाल का बिगड़ा संतुलन

इस ऐतिहासिक रथ यात्रा महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में सूबे के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए:

  • तोरण द्वार का निर्माण: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंदिर की भव्यता और पहचान को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने के लिए एक बड़ी घोषणा की. उन्होंने कहा कि जगन्नाथपुर मंदिर को जोड़ने वाले मार्ग (नयासराय रिंग रोड के पास) पर राज्य सरकार की ओर से एक भव्य तोरण द्वार का निर्माण कराया जाएगा.

  • राज्यपाल का बिगड़ा संतुलन: रथ यात्रा के दौरान रथ से नीचे उतरते समय राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार का अचानक संतुलन बिगड़ गया. हालांकि, वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और सेवादारों ने उन्हें तत्काल सहारा देकर सुरक्षित नीचे उतारा. इसके बाद मुख्यमंत्री समेत अन्य वीआईपी को भी कड़ी सुरक्षा के बीच नीचे लाया गया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *