रांची (राणा प्रताप). झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली और अदालती आदेशों की अनदेखी पर कड़ा रुख अख्तियार किया है. जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पथ निर्माण विभाग के तीन वरिष्ठ अभियंताओं (Engineers) के वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
इन अधिकारियों पर गिरी गाज अदालत ने अवमानना की गंभीरता को देखते हुए विभाग के मुख्य अभियंता मनोहर कुमार, अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार श्रीवास्तव और कार्यपालक अभियंता विनोद कच्छप के वेतन भुगतान पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. साथ ही, विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार समेत इन सभी अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक मूल आदेश का पालन नहीं हुआ, तो प्रधान सचिव का वेतन भी रोक दिया जाएगा.
पेंशन भुगतान से जुड़ा है मामला यह पूरा मामला रंजीत बिहारी प्रसाद द्वारा दायर अवमानना याचिका से संबंधित है. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 15 जनवरी 2024 को ही राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि प्रार्थी की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का निर्धारण कर आठ सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए. हालांकि, निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया.
कोर्ट ने खारिज किया ‘अपील’ का बहाना सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई कि मामले में अपील दायर की गई है. इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि अपील दायर करना आदेश के अनुपालन को रोकने का आधार नहीं हो सकता, खासकर तब जब कार्रवाई में जानबूझकर देरी की गई हो. अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को 12 जून 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है.
