राजगीर. बिहार की ज्ञान भूमि नालंदा के लिए मंगलवार, 31 मार्च 2026 का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है. भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगी. बतौर राष्ट्रपति यह उनका पहला नालंदा दौरा है, जिसे लेकर विश्वविद्यालय और प्रशासन ने भव्य तैयारियां पूरी कर ली हैं.
नए परिसर में पहला दीक्षांत और ‘विश्वमित्रालय’ का लोकार्पण यह समारोह इसलिए विशेष है क्योंकि नालंदा विश्वविद्यालय के नवनिर्मित परिसर में आयोजित होने वाला यह पहला दीक्षांत कार्यक्रम है.
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अत्याधुनिक सभागार: राष्ट्रपति विश्वविद्यालय में 2,000 सीटों वाले हाईटेक एम्फीथिएटर ‘विश्वमित्रालय’ का उद्घाटन करेंगी. यह सभागार वैश्विक सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों का नया केंद्र बनेगा.
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दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र: दोपहर के सत्र में राष्ट्रपति उस ‘दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र’ का औपचारिक शुभारंभ करेंगी, जिसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी.
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विशेष पत्रिका: इस अवसर पर विश्वविद्यालय की विशेष पत्रिका ‘मंजिरी’ का विमोचन भी महामहिम के हाथों संपन्न होगा.
मिनी वर्ल्ड बनेगा दीक्षांत समारोह नालंदा की प्राचीन गौरवशाली परंपरा को जीवंत करते हुए इस समारोह में अर्जेंटीना, वियतनाम, केन्या, थाईलैंड और सर्बिया सहित दर्जनों देशों के छात्र शामिल हो रहे हैं. राष्ट्रपति 10 पीएचडी शोधार्थियों और 36 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक (Gold Medal) व डिग्रियां प्रदान कर उन्हें प्रोत्साहित करेंगी.
प्राचीन खंडहरों का दीदार और सुरक्षा के कड़े इंतजाम दीक्षांत समारोह के पश्चात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नालंदा के उन ऐतिहासिक खंडहरों का भ्रमण करेंगी, जो कभी विश्व के ज्ञान का शीर्ष केंद्र थे. राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए पूरे राजगीर को सुरक्षा के लिहाज से छावनी में तब्दील कर दिया गया है. चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं.
