रांची. झारखंड में मई के महीने में ही मौसम का मिजाज बदला हुआ है. आंधी और झमाझम बारिश के बीच आम जनता के लिए एक और राहत भरी खबर है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून समय से पहले पहुंच सकता है. अगर मौसम विभाग का पूर्वानुमान सटीक बैठता है, तो झारखंड में पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मॉनसून 12 दिन पहले दस्तक दे देगा.
केरल और झारखंड में कब आएगा मॉनसून?
मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मॉनसून की रफ्तार इस बार काफी अच्छी है:
-
केरल में दस्तक: इस वर्ष केरल में मॉनसून के 26 मई तक पहुंचने की संभावना है (इसमें चार दिन आगे-पीछे होने का अनुमान रहता है).
-
झारखंड में आगमन: केरल पहुंचने के ठीक 10 से 12 दिन बाद, यानी 5 से 6 जून के बीच मॉनसून के झारखंड पहुंचने की पूरी उम्मीद है.
पिछले साल (2025) से तुलना
पिछले साल यानी 2025 में मॉनसून 24 मई को ही केरल पहुंच गया था, लेकिन झारखंड आते-आते उसे 17 जून तक का समय लग गया था. इस लिहाज से देखें तो इस बार झारखंड के लोगों को भीषण गर्मी से बहुत पहले ही राहत मिल जाएगी. फिलहाल मई के महीने में हो रही लगातार आंधी-बारिश को देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जल्द ही राज्य में ‘प्री-मॉनसून’ गतिविधियां भी शुरू हो जाएंगी.
अल-नीनो (Al-Nino) का दिख सकता है असर
आईएमडी ने अपनी रिपोर्ट में एक चिंताजनक बात भी साझा की है. भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो-साउदर्न ओसिलेशन (ENSO) की तटस्थ परिस्थितियां धीरे-धीरे सक्रिय अल-नीनो में बदल रही हैं. इस अल-नीनो परिस्थितियों के विकसित होने के कारण देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की भी आशंका जताई गई है.
अंडमान में अनुकूल परिस्थितियां
राहत की बात यह है कि अगले 24 घंटों के भीतर दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बन चुकी हैं, जिससे इसकी समय पर विदाई और समय से पहले भारत के मुख्य भूभाग में प्रवेश का रास्ता साफ हो रहा है. गौरतलब है कि भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की मुख्य अवधि जून से सितंबर तक रहती है.
