धनबाद. धनबाद जिले के टांडाबारी में हाल ही में हुए दर्दनाक भू-धंसान (Land Subsidence) हादसे में तीन लोगों की मौत के बाद अभी जिला पूरी तरह उबरा भी नहीं था कि शुक्रवार सुबह मधुबन थाना क्षेत्र के सिनीडीह लफड़ा मोड़ के पास फिर से वैसी ही आपदा की आशंका से पूरे इलाके में दहशत फैल गई. यहाँ अचानक तीन रिहायशी मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं और घरों के अंदर से दीवारों के टूटने व चरचराहट की आवाजें आने लगीं, जिससे स्थानीय लोगों के बीच चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई.
जान बचाने के लिए सामान लेकर घरों से भागे परिवार
शुक्रवार सुबह जैसे ही इस भू-धंसान की आहट हुई, प्रभावित क्षेत्रों में हड़कंप मच गया:
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खाली किए मकान: स्थिति की गंभीरता और जानमाल के खतरे को देखते हुए लक्ष्मण भुइया, सूरज भुइया और करण भुइया के परिवारों ने बिना वक्त गंवाए अपने-अपने घरों से राशन, कपड़े और कीमती सामान बाहर निकालना शुरू कर दिया और मकानों को पूरी तरह खाली कर दिया.
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बड़ा हादसा टला: स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित घरों के नीचे जमीन लगातार खोखली हो रही है और कभी भी पूरा का पूरा इलाका जमींदोज हो सकता है. समय रहते घरों को खाली कर देने से एक बड़ा हादसा टल गया.
पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर बीसीसीएल के खिलाफ फूटा गुस्सा
घटना की खबर फैलते ही सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण सिनीडीह लफड़ा मोड़ पर जुट गए और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को लेकर आक्रोशित हो उठे.
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नेताओं के नेतृत्व में प्रदर्शन: भाजपा नेता गोरचंद बाउरी और मुखिया प्रतिनिधि बिट्टू चौहान के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन की कोयला खनन नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और प्रदर्शन किया.
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प्रमुख मांगें: आंदोलनकारियों ने मांग की है कि बीसीसीएल प्रबंधन तुरंत इन बेघर हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वासित (Rehabilitate) करे, इन्हें उचित मुआवजा दे और क्षेत्र के अन्य कमजोर मकानों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कराने की व्यवस्था करे.
प्रशासनिक अमला पहुंचा मौके पर, ट्रांसपोर्टिंग रोड पर भी संकट
आक्रोश और हंगामे की सूचना मिलने के बाद बीसीसीएल के आधिकारिक सर्वेक्षक, सीआईएसएफ (CISF) के जवान और मधुबन थाना की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची. प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित मकानों और दरारों का बारीकी से मुआयना किया.
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बीसीसीएल के लिए कोयला ले जाने वाली एक निजी कंपनी की मुख्य ट्रांसपोर्टिंग सड़क (कोयला ढुलाई मार्ग) का एक बड़ा हिस्सा भी इस भू-धंसान की जद में आ रहा है. सड़क धंसने की आशंका से भारी वाहनों के आवागमन पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा एक्सीडेंट हो सकता है. पुलिस और प्रशासन ग्रामीणों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में जुटे हैं.
