नई दिल्ली . मोदी सरकार द्वारा बुलाए गए संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र (16-18 अप्रैल) के पहले दिन भारी हंगामा देखने को मिला . लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पेश करने के पक्ष में 207 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 126 सदस्यों ने इसका विरोध किया .
विपक्ष का तीखा विरोध:
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संघीय ढांचे पर हमला: कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बिल को भारत के संघीय ढांचे पर सीधा हमला बताया .
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दस्तावेज जलाकर विरोध: तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने विधेयक की प्रति जलाकर विरोध जताया और इसे ‘काला कानून’ करार दिया .
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आरक्षण के भीतर आरक्षण: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार जनगणना से बचना चाहती है . उन्होंने इसमें दलित, मुस्लिम और पिछड़ों के लिए अलग आरक्षण की मांग दोहराई .
सरकार का पक्ष:
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ऐतिहासिक कदम: पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाने को तैयार है .
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अमित शाह का जवाब: गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है . उन्होंने बताया कि 2027 की जनगणना की तैयारी चल रही है और सरकार जाति आधारित गणना के पक्ष में है .
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भ्रम न फैलाएं: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि परिसीमन के नाम पर दक्षिण भारत के लोगों को गुमराह न किया जाए .
बदलाव की मुख्य वजह: बता दें कि 2023 में बने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पहले जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था . अब सरकार नए संशोधन के जरिए इसे जल्द लागू करना चाहती है, जिसका विपक्ष विरोध कर रहा है . इसी बीच, राज्यसभा की कार्यवाही दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद शुक्रवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई .
