गढ़वा. झारखंड के गढ़वा जिले का रंका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) आज पूरे पलामू प्रमंडल के लिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का एक आदर्श उदाहरण बनकर उभरा है. केंद्र सरकार के आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत यहां स्वास्थ्य सेवाओं का ऐसा विस्तार हुआ है कि अब यह एक साधारण सीएचसी से ऊपर उठकर जिला अस्पताल के स्तर की सुविधाएं प्रदान कर रहा है.
राज्य स्तर पर मिली बड़ी उपलब्धि
रंका सीएचसी ने अपनी कार्यक्षमता के दम पर पूरे झारखंड में विशिष्ट पहचान बनाई है:
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नंबर 2 स्थान: परिवार नियोजन और बंध्याकरण के क्षेत्र में इस केंद्र ने पूरे राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया है.
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आंकड़े: एक वर्ष के भीतर यहां 1018 सफल ऑपरेशन किए गए, जिसके लिए केंद्र को राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है.
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प्रसव सेवाएं: यहां हर महीने औसतन 250 से 300 सुरक्षित प्रसव कराए जा रहे हैं.
नेतृत्व और टीम वर्क से बदली सूरत
अस्पताल के इस कायाकल्प के पीछे प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. असजद अंसारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
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चुनौतियां: 2023 में जब डॉ. अंसारी ने जिम्मेदारी संभाली, तब यहां केवल वे और उनकी पत्नी डॉ. मजहबी ही कार्यरत थे.
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विस्तार: आज यहाँ पांच डॉक्टरों की सशक्त टीम है. डॉ. अंसारी का विजन है कि ग्रामीण मरीजों को निजी अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही सम्मानजनक मुफ्त इलाज मिले.
भविष्य की योजनाएं: अब और भी आधुनिक होगा केंद्र
अस्पताल प्रशासन अब रंका सीएचसी को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने की तैयारी में है:
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ब्लड बैंक और डायलिसिस: ब्लड बैंक की स्थापना के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, जिसके शुरू होने के बाद सिजेरियन और जटिल सर्जरी आसान हो जाएगी. साथ ही डायलिसिस यूनिट की भी योजना है.
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कुपोषण उपचार केंद्र (MTC): बच्चों के लिए एमटीसी केंद्र और परिजनों के लिए कैंटीन की सुविधा जल्द शुरू होगी.
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क्षेत्रीय प्रभाव: बेहतर सुविधाओं के कारण अब यहाँ केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों के मरीज भी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं.
रंका सीएचसी की यह सफलता साबित करती है कि यदि नेतृत्व सही हो और टीम में समर्पण हो, तो सीमित संसाधनों में भी ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बदली जा सकती है.
