सरायकेला. झारखंड के सरायकेला जिला अंतर्गत खरसावां विधानसभा क्षेत्र के जोजो गांव में पारंपरिक आस्था और उत्साह के साथ ‘आदिवासी सरहुल महोत्सव’ का आयोजन किया गया. आदिवासी भूमिज मुंडा समाज के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए, जो आदिवासी संस्कृति और एकता का जीवंत उदाहरण बना.
जाहेरथान में पूजा-अर्चना और सरखोसी महोत्सव की शुरुआत नाया गणेश सरदार द्वारा जाहेरथान (सरना स्थल) में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुई. इस दौरान क्षेत्र की सुख, शांति, समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की गई. पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से अपने कानों पर सखुआ (सरई) का फूल लगाकर ‘सरखोसी’ की रस्म पूरी की.
प्रकृति और मानव का अटूट संबंध: विधायक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक दशरथ गागराई ने कहा, “सरहुल पर्व प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के गहरे संबंधों का प्रतीक है. आदिवासी समाज का प्रकृति के साथ अनन्याश्रय संबंध है और यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की प्रेरणा देता है.” वहीं, जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सरदार ने भी सरहुल को जनजातीय परंपराओं और सामुदायिक एकता का प्रतीक बताया.
मांदर और नगाड़ों की थाप पर सामूहिक नृत्य पूजा के बाद पूरा जोजो गांव पारंपरिक गीत-संगीत से गूंज उठा. पुरुषों और महिलाओं ने मांदर और नगाड़ों की थाप पर सामूहिक नृत्य कर सभी का मन मोह लिया. यह सांस्कृतिक सिलसिला देर शाम तक चलता रहा. कार्यक्रम में मुख्य रूप से सामाजिक कार्यकर्ता बासंती गागराई, मुखिया मीना माझी, लव किशोर सरदार समेत भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.
