गढ़वा. झारखंड के गढ़वा जिले का सदर अस्पताल एक बार फिर अपनी बदहाली और संवेदनहीनता को लेकर सवालों के घेरे में है। करोड़ों के बजट और सरकारी दावों के बीच अस्पताल की हकीकत यह है कि यहाँ मरीजों को स्लाइन (पानी की बोतल) चढ़ाने के लिए एक स्टैंड तक नसीब नहीं हो रहा। ताज़ा मामला धुरकी थाना क्षेत्र के एक घायल युवक का है, जिसके परिजनों को घंटों हाथ में बोतल लेकर खड़े रहकर उसका इलाज कराना पड़ा।
शादी की खुशियों के बीच मातम: धुरकी के बरसौती गांव निवासी दशरथ कुमार सिंह शुक्रवार को बाइक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। दशरथ के घर में 25 अप्रैल को चचेरे भाई और 26 अप्रैल को सगी बहन की शादी है। वह डंडई से शादी के कपड़े खरीदकर लौट रहा था, तभी बरसौता गांव के पास गाय को बचाने के चक्कर में उसकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। खुशियों वाले घर में अचानक इस हादसे से कोहराम मच गया।
मिन्नतों के बाद इलाज, स्टैंड के लाले: परिजन जब घायल को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे, तो वहां की व्यवस्था देख उनके होश उड़ गए:
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हाथ में पकड़ी बोतल: अस्पताल में स्लाइन स्टैंड उपलब्ध नहीं था। मजबूरन परिजनों को खुद ही हाथ में बोतल लेकर घंटों खड़ा रहना पड़ा।
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संवेदनहीनता: घायल युवक दर्द से कराहता रहा, लेकिन परिजनों के अनुसार काफी मिन्नतें करने के बाद ही डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया।
कुव्यवस्था का पुराना रिकॉर्ड: गढ़वा सदर अस्पताल में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहाँ कई शर्मनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं:
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गत्ते से हवा: हाल ही में ड्रेसिंग रूम में एसी और पंखा खराब होने पर परिजनों को गत्ते से हवा करते देखा गया था।
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ठेले पर मरीज: एंबुलेंस न मिलने पर एक बेटा अपनी मां को ठेले पर लेकर अस्पताल पहुंचा था।
अस्पताल की यह स्थिति जिले के स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। जब बुनियादी सुविधाएं ही नदारद हों, तो मरीज के बेहतर इलाज की उम्मीद बेमानी लगती है।
