सिमडेगा: 10 दिनों से शहर में पानी के लिए हाहाकार, 1985 की ‘एक्सपायरी’ पाइपलाइन के भरोसे जलापूर्ति

झारखंड

सिमडेगा. सिमडेगा जिले के शहरी क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच गहराया पेयजल संकट अब विकराल रूप ले चुका है। पिछले 10 दिनों से शहर की जलापूर्ति पूरी तरह से ठप है। लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए चापाकल, छोटी जलमीनारों और निजी स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। नगर परिषद की सुस्त कार्यप्रणाली ने शहरवासियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

राउरकेला से मंगाए जा रहे पार्ट्स: जलापूर्ति ठप होने का मुख्य कारण मेन मोटर में आई गंभीर तकनीकी खराबी है।

  • पार्ट्स की कमी: मोटर इतनी पुरानी है कि सिमडेगा में इसके स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं हैं।

  • मरम्मत में देरी: नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार, आवश्यक कलपुर्जे ओडिशा के राउरकेला से मंगाए जा रहे हैं, जिसकी वजह से मरम्मत कार्य अधर में लटका हुआ है।

1985 की ‘एक्सपायरी’ व्यवस्था के भरोसे शहर: सिमडेगा में जलापूर्ति की बदहाली का सबसे बड़ा कारण इसकी जर्जर आधारभूत संरचना है। विभागीय सूत्रों की मानें तो शहर में पानी की सप्लाई 1985 में लगाए गए उपकरणों के सहारे ही हो रही है। लगभग 10 साल पहले ही पाइपलाइन और अन्य संयंत्रों को ‘एक्सपायरी’ (अवधि पार) घोषित किया जा चुका था, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई आधुनिक या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।

रविवार तक ही मिल सकेगी राहत: नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अरविंद कुमार तिर्की ने बताया कि पार्ट्स पहुंचने के बाद मरम्मत का काम पूरा किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अगले रविवार तक ही नियमित जलापूर्ति बहाल हो सकेगी।

  • टैंकरों से सप्लाई: फिलहाल नगर परिषद द्वारा कुछ चुनिंदा इलाकों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है, जो शहर की विशाल आबादी के लिए नाकाफी साबित हो रहा है।

हर साल गर्मी में पैदा होने वाले इस संकट और प्रशासन के उदासीन रवैये को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। लोग अब इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

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