पटना. बिहार की सियासत में शनिवार को एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। पिछले दो दशकों से हर साल गांधी मैदान में नमाजियों से मिलने वाली मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्थापित परंपरा इस बार टूट गई। 20 साल में यह पहला मौका था जब सीएम खुद आयोजन में शामिल नहीं हुए। उनकी जगह उनके बेटे निशांत कुमार ने मोर्चा संभाला और अल्पसंख्यक समुदाय के बीच पूरी तरह सक्रिय नजर आए।
निशांत की बढ़ती सक्रियता और सियासी संकेत:
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‘पॉलिटिकल ट्रेनिंग’ का हिस्सा: 8 मार्च 2026 को जदयू (JDU) की आधिकारिक सदस्यता लेने के बाद निशांत कुमार की यह पहली बड़ी सार्वजनिक मौजूदगी है। विशेषज्ञों के अनुसार, नीतीश कुमार उन्हें धीरे-धीरे ‘स्पेस’ दे रहे हैं।
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ललन सिंह से गुप्त मंत्रणा: गांधी मैदान से सीधे निशांत कुमार जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह के आवास पहुंचे। दोनों के बीच करीब 15 मिनट की बंद कमरे में बैठक हुई, जिसे आगामी संगठनात्मक बदलावों और चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
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संगठन पर पकड़: शनिवार शाम को ही निशांत ने मुख्यमंत्री आवास (1, अणे मार्ग) में जदयू प्रवक्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। यह पहली बार है जब उन्होंने पार्टी के किसी खास विंग की औपचारिक मीटिंग की अध्यक्षता की है।
नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य कारणों और राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच खुद को बड़े सार्वजनिक मंचों से दूर रखा है और राज्यवासियों को केवल सोशल मीडिया के जरिए बधाई दी। निशांत की इस ‘ग्रैंड एंट्री’ को जदयू के भविष्य और ‘उत्तराधिकारी’ के रूप में एक बड़े मैसेज के तौर पर देखा जा रहा है।
