रांची. कभी राज्य की औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा रांची का कोकर इंडस्ट्रियल एरिया आज बदहाली, टूटी सड़कों, जलजमाव और गंदगी की मार झेल रहा है. बुनियादी सुविधाओं के अभाव से परेशान क्षेत्र की 150 औद्योगिक इकाइयों के उद्यमियों ने जियाडा (JIADA) के नाम एक खुला पत्र लिखकर अपनी पीड़ा जाहिर की है और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
उद्यमियों का कहना है कि वे हर साल नियमित रूप से यूजर चार्ज और टैक्स का भुगतान करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल उपेक्षा और आश्वासन मिलता है.
उद्यमियों द्वारा खुले पत्र में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
पत्र के माध्यम से 150 उद्यमियों ने क्षेत्र की विकट समस्याओं को उजागर किया है:
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22 वर्षों से सड़क का पुनर्निर्माण नहीं: क्षेत्र की 3 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण वर्ष 2003-04 में हुआ था. इसके बाद पिछले 22 सालों से न तो सड़क का पुनर्निर्माण हुआ और न ही कोई बड़ी मरम्मत. बारिश में सड़कें तालाब बन जाती हैं.
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लाखों रुपये यूजर चार्ज, सुविधाएं शून्य: जियाडा प्रति वर्ष प्रति एकड़ 16,300 रुपये की दर से पूरे क्षेत्र से करीब 8.80 लाख रुपये यूजर चार्ज वसूलता है. इसके बावजूद सड़क, सफाई, पेयजल, पार्किंग और सार्वजनिक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं.
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उद्योगों की जगह कब्जा रहे वेयरहाउस: मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण कई उत्पादन इकाइयां बंद हो गई हैं. अब उनकी जगह ओल्ड कार शोरूम, सर्विस सेंटर और वेयरहाउस खुल रहे हैं, जिससे औद्योगिक पहचान खत्म हो रही है.
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गंदगी, अवैध पार्किंग और ट्रैफिक जाम: क्षेत्र में नालियां जाम हैं और औद्योगिक कचरा खुले में फेंका जा रहा है. लालपुर और कांटाटोली को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग होने के कारण यहां दिनभर अवैध पार्किंग और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है.
उद्यमियों ने जियाडा और प्रशासन से जल्द से जल्द सड़कों के जीर्णोद्धार और बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने की मांग की है.
