करोड़ों खर्च फिर भी पढ़ाई ठप: बिरनी मॉडल डिग्री कॉलेज में शिक्षकों की बहाली न होने से 80 विद्यार्थियों का भविष्य अधर में; प्रतिनियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी

गिरिडीह झारखंड

बिरनी. ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निर्मित मॉडल डिग्री कॉलेज, बिरनी आज घोर प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का शिकार है. भवन निर्माण और साजो-सामान पर लगभग 6.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से कॉलेज में पठन-पाठन ठप पड़ा हुआ है.

2014 में शिलान्यास, 2022 में मिली पढ़ाई की मंजूरी

कॉलेज के निर्माण और सुविधाओं के विकास की प्रक्रिया काफी लंबी रही है:

  • शिलान्यास व निर्माण: वर्ष 2014 में कोडरमा के तत्कालीन सांसद रविंद्र कुमार राय और पूर्व विधायक बिनोद कुमार सिंह ने करीब 3.5 करोड़ रुपये की लागत से इस कॉलेज भवन की आधारशिला रखी थी, जो 2019 में बनकर तैयार हुआ.

  • आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध: वर्ष 2022 में राज्य सरकार से पढ़ाई की स्वीकृति मिलने के बाद भवन को सुसज्जित करने, चहारदीवारी बनाने और आधुनिक संसाधन जुटाने पर करीब 3 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए गए.

वर्ष 2026 में 80 नामांकन, पर पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं

शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद शैक्षणिक वर्ष 2026 में क्षेत्र के 80 छात्र-छात्राओं ने कॉलेज में दाखिला लिया है:

  • संकायवार स्थिति: कला (Arts) संकाय में 78 और विज्ञान (Science) संकाय में केवल 2 विद्यार्थियों ने नामांकन कराया है.

  • भविष्य पर संकट: नियमित प्राध्यापकों के न होने से विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अभिभावकों का कहना है कि यदि स्थायी शिक्षक उपलब्ध हों, तो ग्रामीण व गरीब मेधावी छात्रों को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा.

आउटसोर्सिंग के भरोसे संचालन, AISA ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

आइसा (AISA) छात्र प्रतिनिधि रंजीत बैठा (सिमराढाब) ने कॉलेज की बदहाली पर कड़ा रोष व्यक्त किया है:

  • प्रभार में प्राचार्य: कॉलेज में कोई स्थायी कर्मचारी नहीं है और राजधनवार कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार बरनवाल को ही बिरनी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.

  • प्रतिनियुक्ति की मांग: छात्र संगठन ने मांग की है कि अंगीभूत कॉलेजों (Constituent Colleges) से दो-चार शिक्षकों और क्लर्कों की तत्काल बिरनी कॉलेज में डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) की जाए, ताकि कक्षाएं शुरू हो सकें.

  • आंदोलन का अल्टीमेटम: आइसा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई, तो छात्रहित में उग्र जनआंदोलन शुरू किया जाएगा.

(नोट: मामले पर पक्ष जानने के लिए प्रभारी प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार बरनवाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया.)

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