कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 4 मई 2026 का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है। सूबे की कद्दावर नेता और तीन बार की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने ही घर भवानीपुर में भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों के अंतर से हार गई हैं। शुभेंदु अधिकारी को 73,917 मत मिले, जबकि ममता बनर्जी 58,812 वोटों पर सिमट गईं। 2021 में नंदीग्राम के बाद, शुभेंदु ने एक बार फिर दीदी को शिकस्त देकर बंगाल की सत्ता से उनके विदाई की पटकथा लिख दी है।
हार के प्रमुख कारण: एक नजर में
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महिलाओं का मोहभंग: विशेषज्ञों के अनुसार, आरजी कर अस्पताल की घटना और संदेशखाली मुद्दे ने महिला सुरक्षा को लेकर टीएमसी के खिलाफ माहौल बनाया। महिलाओं ने ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं के बावजूद सुरक्षा और रोजगार के मुद्दे पर भाजपा को चुना।
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स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR): चुनाव से पहले वोटर लिस्ट से लगभग 90 लाख नाम हटे। टीएमसी ने इसे अपने कोर वोटर्स पर हमला बताया, जिसका सीधा असर मतदान के दिन आंकड़ों में दिखा।
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एंटी-इनकम्बेंसी और भ्रष्टाचार: शिक्षक भर्ती घोटाला, राशन घोटाला और ‘कट मनी’ जैसे आरोपों ने शहरी मतदाताओं को सरकार से दूर कर दिया।
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ध्रुवीकरण और वोट बैंक: शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि जहां वार्ड नंबर 77 के मुस्लिम वोट दीदी को मिले, वहीं हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध मतदाताओं ने एकजुट होकर भाजपा के पक्ष में मतदान किया।
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शुभेंदु की सटीक रणनीति: भाजपा ने बूथ स्तर पर आक्रामक प्रबंधन किया। शुभेंदु अधिकारी ने मतगणना के अंतिम राउंड में जीत की जो भविष्यवाणी की थी, नतीजे लगभग उसी के अनुरूप रहे।
ममता बनर्जी का चुनाव प्रचार के दौरान बीच भाषण में मंच छोड़कर जाना और हाथ जोड़कर वोट मांगना उनकी कमजोरी के रूप में देखा गया। शुभेंदु अधिकारी ने अपनी जीत को “ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा का अंत” करार दिया है। इस परिणाम के साथ ही बंगाल में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत होती दिख रही है।
