सिस्टम की भेंट चढ़ा तिलैया डैम का ‘ईको टूरिज्म’ प्रोजेक्ट: केंद्र ने दिए 23 करोड़, मगर 10 महीने से झारखंड सरकार के पास धूल फांक रहा है फंड

झारखंड

कोडरमा. झारखंड के कोडरमा जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल तिलैया डैम को ‘ईको टूरिज्म’ के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल अधर में लटकी नजर आ रही है। केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की राशि आवंटित किए जाने के बावजूद राज्य सरकार की कथित उदासीनता के कारण धरातल पर एक ईंट भी नहीं रखी जा सकी है।

फंड मिला पर काम नहीं: पर्यटन मंत्रालय (भारत सरकार) ने नवंबर 2024 में SASCI योजना के तहत तिलैया डैम के विकास के लिए 34.87 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी।

  • जारी हुई राशि: केंद्र सरकार ने कुल बजट में से 23.77 करोड़ रुपये राज्य सरकार को पहले ही भेज दिए हैं।

  • अटका कैबिनेट एप्रूवल: पिछले 10 महीनों से यह भारी-भरकम राशि राज्य पर्यटन विभाग के पास पड़ी है, लेकिन अब तक इसके लिए कैबिनेट एप्रूवल तक नहीं लिया गया है।

सांसद अन्नपूर्णा देवी ने सरकार को घेरा: कोडरमा सांसद और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, जिन्होंने इस परियोजना को मंजूरी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी, ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा:

“राज्य सरकार अक्सर केंद्र पर फंड न देने का आरोप लगाती है, जबकि हकीकत यह है कि जो पैसा मिलता है, उसका उपयोग ही नहीं किया जा रहा। तिलैया डैम के विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ते, लेकिन सरकार गंभीर नहीं है।”

पर्यटकों को मूलभूत सुविधाओं का इंतजार: बराकर नदी पर बना तिलैया डैम स्वतंत्र भारत का पहला डैम है, जो 35 वर्ग किमी में फैला है। खूबसूरत नजारों के बावजूद यहाँ पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है:

  • क्या है जरूरत: पेयजल, आधुनिक शौचालय, बेहतर बिजली व्यवस्था, अच्छे रेस्टोरेंट और गेस्ट हाउस।

  • विकास की आस: 2024 में केंद्र ने देश के 23 राज्यों के 40 केंद्रों में तिलैया डैम को भी विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने के लिए चुना था।

रोजगार पर भी असर: अगर यह योजना समय पर पूरी होती, तो कोडरमा जिले में पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयां मिलतीं और सैकड़ों युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता। फिलहाल, फाइलों में दबी इस योजना के कारण तिलैया डैम की तस्वीर बदलने का सपना अधूरा ही दिख रहा है।

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