कोलकाता. पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (25 अप्रैल 2026) को राज्य के कई हिस्सों में एक साथ छापेमारी की। उत्तर 24 परगना के हाबरा में प्रमुख कारोबारी पार्थ सारथी और निरंजन चंद्र साहा सहित कई सप्लायरों और एक्सपोर्टर्स के ठिकानों पर जांच जारी है।
9 ठिकानों पर एक साथ दबिश: ED के अधिकारियों के अनुसार, कोलकाता, बर्दवान और उत्तर 24 परगना के कुल नौ ठिकानों पर यह छापेमारी चल रही है। जांच टीम के साथ भारी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान तैनात हैं। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है ताकि घोटाले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय दस्तावेजों को जब्त किया जा सके।
क्या है पूरा मामला? यह मामला साल 2020 में बसीरहाट पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR से शुरू हुआ था। आरोप है कि गरीबों के लिए आने वाले सरकारी गेहूं और राशन की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई:
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असली बोरे हटाना: आरोप है कि एफसीआई (FCI) और राज्य सरकार के मार्का वाले बोरों से गेहूं निकालकर उन्हें सादे या नए बोरों में भरा जाता था ताकि सरकारी पहचान छिपाई जा सके।
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अवैध बिक्री: इस राशन को सप्लायरों, डीलरों और बिचौलियों के गठजोड़ के जरिए सस्ते दामों पर खरीदकर खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा गया या विदेश निर्यात करने की कोशिश की गई।
पूर्व मंत्री पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार: गौरतलब है कि इसी घोटाले में पश्चिम बंगाल के पूर्व खाद्य मंत्री ज्योति प्रिय मलिक को ED पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उनके करीबियों और राशन डीलरों से पूछताछ के बाद अब उन निर्यातकों और बड़े सप्लायरों पर शिकंजा कसा जा रहा है, जिन्होंने इस घोटाले के जरिए काले धन को सफेद करने में मदद की।
चुनावी माहौल में बढ़ी सख्ती: लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हो रही इस छापेमारी को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। ED का दावा है कि सप्लाई चेन से गायब किए गए गेहूं और चावल के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन हुआ है, जिसकी कड़ियों को जोड़ने के लिए यह छापेमारी की गई है।
