बदलाव की बयार: गढ़वा में बिना सरकारी बजट जनसहभागिता से धरातल पर उतरा ‘आपन सरस्वतिया’ अभियान; अतिक्रमण पर चला पीला पंजा, तकनीक का सहारा

झारखंड

गढ़वा. बिना किसी भारी-भरकम सरकारी बजट या वित्तीय अनुदान के, सिर्फ और सिर्फ जनसहभागिता (Public Participation) के दम पर गढ़वा की लाइफलाइन मानी जाने वाली सरस्वतिया नदी को उसका पुराना वजूद और गौरव लौटाने की कोशिशें अब एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी हैं. गढ़वा शहरी क्षेत्र में जहां इस नदी जीर्णोद्धार अभियान के सफल 14 दिन पूरे हो गए हैं, वहीं मेराल प्रखंड में भी इस मुहिम ने एक सप्ताह (7 दिन) का सफर तय कर लिया है. इस अभूतपूर्व कामयाबी के बाद, आज सोमवार से शुरू हो रहे नए सप्ताह के साथ नदी को उसके प्राकृतिक स्वरूप में वापस लाने और सफाई कार्य को और अधिक गति देने की मुकम्मल तैयारी की गई है.

हाईटेक मॉनिटरिंग: ड्रोन कैमरे और गूगल अर्थ से बन रहा ब्लूप्रिंट

प्रशासन और आम अवाम के इस साझा और अनूठे प्रयास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आधुनिक विज्ञान और तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है:

  • डिजिटल मूल्यांकन: नदी के उद्गम, प्रवाह क्षेत्र और मुहाने की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए गूगल अर्थ (Google Earth) और ड्रोन कैमरों की मदद से पूरी कार्ययोजना (Master Plan) तैयार की जा रही है.

  • एसडीएम ने किया मुआयना: गढ़वा के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने स्वयं गढ़वा और मेराल दोनों संवेदनशील इलाकों का धरातल पर मुआयना किया. गढ़वा शहर में इस मुहिम को आगे बढ़ाने में सहीजना निवासी दीपक कुमार पाठक प्रमुख सहयोगी के रूप में सामने आए हैं, जिनकी प्रशासनिक स्तर पर सराहना की गई है.

  • निशुल्क तकनीक सेवा: तेनार गांव के नागेंद्र प्रजापति इस पुनीत कार्य में निशुल्क ड्रोन सेवा देकर नदी के पूरे कैचमेंट एरिया का डिजिटल मूल्यांकन करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.

मेराल में 100 से अधिक लोगों ने किया श्रमदान

इधर मेराल प्रखंड क्षेत्र में बीडीओ सह अंचलाधिकारी (CO) यशवंत नायक के कुशल नेतृत्व में कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है. नदी की सफाई के लिए पूर्व जिला परिषद सदस्य संजय भगत, विधायक प्रतिनिधि लालमोहन और पूर्वी व पश्चिमी मेराल के मुखियाओं समेत लगभग 100 से अधिक प्रबुद्ध नागरिक, युवा और स्थानीय मीडियाकर्मी इस अभियान में कुदाल और फावड़ा लेकर खुद श्रमदान कर रहे हैं.

‘आपन सरस्वतिया’ अभियान की 5 बड़ी और महत्वपूर्ण बातें

  1. आधा दर्जन जेसीबी से गाद की सफाई: नदी में पिछले कई दशकों से जमी गाद (De-silting), कचरा, झाड़-झंखाड़, बांस की झाड़ियों और अन्य प्राकृतिक अवरोधों को हटाने के लिए वर्तमान में 6 जेसीबी (JCB) मशीनों और दो ट्रैक्टरों को चौबीसों घंटे काम पर लगाया गया है.

  2. अतिक्रमण पर चला पीला पंजा: नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को रोककर बनाई गई कई स्थाई और अस्थाई अवैध कंक्रीट संरचनाओं (अतिक्रमण) को प्रशासन के पीले पंजे (जेसीबी) ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है.

  3. 50 फीट चौड़ाई का महत्वाकांक्षी लक्ष्य: मेराल क्षेत्र में सुचारू जल प्रवाह के लिए नदी के दोनों किनारों को साफ कर उसे कम से कम 50 फीट या उससे अधिक की न्यूनतम चौड़ाई देने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है.

  4. कॉर्पोरेट जगत का भी मिला साथ: पर्यावरण संरक्षण के इस महाअभियान में रेहला स्थित प्रसिद्ध ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए नदी की सफाई के बाद किनारों को सैनिटाइज व कीटाणुमुक्त करने के लिए 20 बोरी ब्लीचिंग पाउडर निशुल्क उपलब्ध कराया है.

  5. बिना बजट की मिसाल: यह अभियान झारखंड के लिए एक नजीर बन गया है, जहां बिना किसी विशेष सरकारी फंड के केवल समाज की चेतना से एक मरती हुई नदी को पुनर्जीवित किया जा रहा है.

प्रशासन की सक्षम नागरिकों से भावुक अपील

संजय कुमार (एसडीएम, गढ़वा): “‘आपन सरस्वतिया’ अब सिर्फ एक सफाई कार्यक्रम या सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि गढ़वा के मान-सम्मान से जुड़ा एक जीवंत सामाजिक आंदोलन बन चुका है. यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अगर समाज और प्रशासन एक सूत्र में बंध जाएं, तो बिना किसी सरकारी खजाने के भी इतने बड़े और असंभव दिखने वाले काम को मुमकिन बनाया जा सकता है. यह नदी हमारी है, इसलिए इसकी सुरक्षा भी हमारी ही सामूहिक जिम्मेदारी है. मैं जिले के तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध व्यवसायियों, ठेकेदारों और सक्षम नागरिकों से अपील करता हूं कि सोमवार से शुरू हो रहे इस नए हफ्ते में अपनी सुविधानुसार मशीनरी या श्रमदान के रूप में इस अभियान से जुड़ें, ताकि सरस्वतिया नदी को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त और प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके.”

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