पटना. बिहार विधानमंडल के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन भी विपक्ष के भारी हंगामे के बीच कार्यवाही शुरू हुई. इस दौरान बिहार विधान परिषद में गांवों में लगाए जाने वाले संभावित होल्डिंग टैक्स का मुद्दा जोर-शोर से गुंजा. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एमएलसी डॉ. सुनील कुमार सिंह ने इस नियमावली को जनविरोधी करार देते हुए सदन में सरकार को घेरा. वहीं, सरकार की ओर से उप मुख्यमंत्री/मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि गरीबों पर टैक्स लगाने की बात पूरी तरह निराधार है.
गौरतलब है कि बिहार सरकार ने ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली-2026’ को कैबिनेट से मंजूरी दी थी, जिसके बाद से ही इस फैसले पर सियासत तेज है.
आरजेडी एमएलसी का आरोप: “5 हजार तक टैक्स लगाना अंग्रेजों जैसा दमनकारी फैसला”
सदन में मुद्दा उठाते हुए RJD एमएलसी डॉ. सुनील कुमार सिंह ने नई नियमावली पर कड़ा ऐतराज जताया:
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ग्रामीण आबादी की स्थिति: उन्होंने कहा कि बिहार की करीब 76 प्रतिशत आबादी गांवों में निवास करती है, जहां परिवारों की औसत वार्षिक आय 76 हजार रुपये से भी कम है. ऐसे में 5 हजार रुपये तक होल्डिंग टैक्स वसूलना पूरी तरह अनुचित है.
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काला कानून करार दिया: एमएलसी ने ‘ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली-2026’ को काला कानून बताते हुए कहा कि आज भी गांव के करोड़ों गरीब ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के राशन पर निर्भर हैं. पंचायत स्तर पर इस तरह की टैक्स वसूली का फैसला अंग्रेजों के जमाने के दमनकारी फरमान जैसा है.
सम्राट चौधरी की सफाई: नियम में होंगे बदलाव, कचरा-पानी शुल्क पहले से तय
आरजेडी एमएलसी के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की:
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दावा निराधार: सम्राट चौधरी ने कहा कि जिस तरह यह प्रचारित किया जा रहा है कि गरीबों पर टैक्स लादा जाएगा, ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और यह दावा पूरी तरह बेबुनियाद है.
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नियमों में होगा संशोधन: उन्होंने बताया कि गांवों में व्यावसायिक होर्डिंग्स और विज्ञापनों पर टैक्स लगाने को लेकर चर्चा चल रही है. राज्य में पहले से ही कचरा प्रबंधन और नल-जल योजना के लिए 30-30 रुपये प्रति माह लेने की व्यवस्था लागू है. सरकार द्वारा बनाए गए नियमों पर विचार कर आवश्यक बदलाव किए जाएंगे.
क्या है ग्राम पंचायत कर नियमावली-2026?
बिहार कैबिनेट द्वारा स्वीकृत इस नियमावली के तहत पंचायतों को अपने वित्तीय संसाधन जुटाने का अधिकार दिया गया है. इसके लागू होने के बाद ग्रामीण इलाकों में स्थित व्यावसायिक जमीन, सिनेमाघर, लघु-कुटीर उद्योग, स्थानीय हाट-बाजार और होर्डिंग्स जैसे क्षेत्रों पर कर (Tax) व शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है.
