रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा गड़बड़ी मामले में सीआईडी (CID) और एसआईटी (SIT) की कार्रवाई तेज होती जा रही है. मामले में पूछताछ के लिए आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को लगातार तीसरे दिन कड़ी सुरक्षा के बीच सीआईडी कार्यालय पहुंचे, जहां जांच अधिकारी उनसे विस्तृत पूछताछ कर रहे हैं.
इससे पूर्व, 28 जुलाई (मंगलवार) को पहले दिन उनसे करीब 8 घंटे तक पूछताछ की गई थी और उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया था. वहीं, 29 जुलाई (बुधवार) को दूसरे दिन भी उनसे परीक्षा संचालन, चयन प्रक्रिया और भर्ती से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर घंटों सवाल-जवाब किए गए थे.
सवालों पर गोलमोल जवाब, CID ने अभ्यर्थियों से मांगी OMR शीट की कार्बन कॉपी
पूछताछ के दौरान एसआईटी ने एल खियांग्ते से ब्लैकलिस्टेड कंपनी के चयन, आरोपी अभय तिवारी से संबंधों और तबादले के बाद भी उपपरीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के पद पर बने रहने को लेकर तीखे सवाल किए थे. हालांकि, खियांग्ते ने अधिकांश सवालों के गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि ‘सबकुछ नियमों के तहत हुआ.’
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीआईडी ने पीटी (PT) परीक्षा में सफल घोषित अभ्यर्थियों से ओएमआर शीट (OMR Sheet) की कार्बन कॉपी मांगी है. इसके लिए विशेष हेल्पलाइन जारी की गई है:
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व्हाट्सएप नंबर: अभ्यर्थी अपने पेपर-1 और पेपर-2 की OMR शीट की कार्बन कॉपी का PDF या फोटो 9934309058 पर भेज सकते हैं.
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ईमेल आईडी: Complainjpsc.cid@jhpolice.gov.in के जरिए भी साक्ष्य SIT को भेजे जा सकते हैं.
अब तक 10 लोग गिरफ्तार, 5 आरोपी रिमांड पर
सीआईडी ने इससे पहले पूर्व अध्यक्ष के कांके रोड स्थित सरकारी आवास, जेपीएससी कार्यालय और टीडीपीएल (TDPL) के दफ्तर में छापेमारी कर अहम दस्तावेज जब्त किए थे.
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कार्रवाई का दायरा: इस मामले में अब तक निलंबित उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
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रिमांड पर पूछताछ: पांच आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर लगातार पूछताछ की जा रही है, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
6 अगस्त से पहले नए अध्यक्ष की नियुक्ति पर मंथन
एल खियांग्ते द्वारा 21 जुलाई 2026 को दिए गए इस्तीफे के बाद से जेपीएससी अध्यक्ष का पद खाली है, जिससे परीक्षाएं और परिणाम लटके हुए हैं. 6 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा के मॉनसून सत्र से पहले राज्य सरकार आयोग में नए अध्यक्ष की नियुक्ति करने या किसी वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी को इसका प्रभार सौंपने पर विचार कर रही है.
