झारखंड में शिक्षकों के लिए बड़ी खबर: NEP के तहत 50 घंटे की ट्रेनिंग अनिवार्य; 15% ने अब तक शुरू भी नहीं की प्रक्रिया, शिक्षा परियोजना निदेशक ने दिए कार्रवाई के निर्देश

रांची

रांची. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानकों के अनुरूप झारखंड के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की शिक्षण क्षमता और गुणवत्ता में सुधार के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक शशि रंजन ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षकों (DSEO) को एक कड़ा आधिकारिक पत्र जारी किया है. इस पत्र के माध्यम से राज्य के सभी शिक्षकों के लिए 50 घंटे का अनिवार्य प्रशिक्षण (Teacher Training) पूरा करने का निर्देश दिया गया है. तय समय सीमा के भीतर इस अनिवार्य कोर्स को पूरा न करने वाले लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ सीधे प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

ट्रेनिंग का पूरा शेड्यूल: 30 घंटे ऑनलाइन और 20 घंटे ऑफलाइन का है प्रावधान

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का खाका पूरी तरह डिजिटल और व्यावहारिक स्तर पर तैयार किया गया है:

  • ट्रेनिंग मॉड्यूल: अनिवार्य 50 घंटों के प्रशिक्षण के तहत शिक्षकों को 30 घंटे का ऑनलाइन और 20 घंटे का ऑफलाइन प्रशिक्षण लेना अनिवार्य किया गया है. यह प्रशिक्षण पूरी तरह से ‘आवश्यकता आधारित आकलन परीक्षा’ के परिणाम के आधार पर तय है, जिसके लिए शिक्षकों की जरूरत के अनुसार अलग-अलग मॉड्यूल तैयार किए गए हैं.

  • कक्षा 1 से 5 के शिक्षकों की डेडलाइन: प्राथमिक कक्षाओं (वर्ग 1 से 5) के शिक्षकों का ऑनलाइन प्रशिक्षण बीते 23 अप्रैल से ही शुरू किया जा चुका है. इसकी निर्धारित समय अवधि आगामी 21 जुलाई को समाप्त हो जाएगी.

  • कक्षा 6 से 12 के शिक्षकों की ट्रेनिंग शुरू: प्राथमिक के बाद अब उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8) और माध्यमिक व उच्च माध्यमिक (कक्षा 9वीं से 12वीं) तक के शिक्षकों के लिए भी ऑनलाइन ट्रेनिंग की प्रक्रिया 2 जुलाई से शुरू कर दी गई है. इसके लिए अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की गई है.

[कुल अनिवार्य प्रशिक्षण: 50 घंटे] 
   ├── ऑनलाइन ट्रेनिंग: 30 घंटे (जे गुरुजी ऐप के माध्यम से)
   └── ऑफलाइन ट्रेनिंग: 20 घंटे (प्रायोगिक और व्यावहारिक)

आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता: 15% शिक्षकों ने अब तक शुरू ही नहीं की ट्रेनिंग

शिक्षा परियोजना द्वारा जिलों को भेजी गई रिपोर्ट में शिक्षकों की लापरवाही को लेकर बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं, जिसके बाद निदेशक ने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का अल्टीमेटम दिया है:

  1. 15 फीसदी शिक्षक पूरी तरह निष्क्रिय: राज्य के लगभग 15 प्रतिशत शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने अंतिम तिथि नजदीक होने के बावजूद अब तक प्रशिक्षण की प्रक्रिया की शुरुआत (लॉगिन) तक नहीं की है.

  2. 41 फीसदी का कोर्स अधूरा: राज्य के 41 प्रतिशत शिक्षकों ने ट्रेनिंग की प्रक्रिया शुरू तो की, लेकिन उसे बीच में ही अधूरा छोड़ दिया है. निदेशक ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे मॉनिटरिंग कर हर हाल में 100% शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्य तय समय में पूर्ण कराएं.

‘जे गुरुजी ऐप’ (J-Guruji App) पर होगा 1 घंटे का मूल्यांकन; पास होने पर मिलेगा सर्टिफिकेट

झारखंड शिक्षा परियोजना के अनुसार, शिक्षकों को केवल ट्रेनिंग वीडियो या मॉड्यूल देखने से ही प्रमाण पत्र नहीं मिल जाएगा. इसके लिए पारदर्शिता और गुणवत्ता की कड़े पैमाने तय किए गए हैं.

प्रशिक्षण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद सभी शिक्षकों को एक डिजिटल मूल्यांकन परीक्षा (Test) से गुजरना होगा. यह मूल्यांकन ‘जे गुरुजी एप’ (J-Guruji App) के माध्यम से ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जाएगा. इस परीक्षा की अवधि 1 घंटा निर्धारित की गई है. मूल्यांकन परीक्षा में सफ़ल होने और प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही शिक्षकों को उनके व्यक्तिगत प्रोफाइल पर ऑनलाइन डिजिटल प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (Certificate) जारी किया जाएगा.

लापरवाही पर रुकेगा वेतन, होगी विभागीय कार्रवाई: परियोजना निदेशक ने साफ कर दिया है कि समय सीमा बीत जाने के बाद भी जो शिक्षक ट्रेनिंग पूरी नहीं करेंगे या मूल्यांकन परीक्षा से बचेंगे, उनके खिलाफ जिलों के शिक्षा अधिकारियों द्वारा कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जिसमें विभागीय स्पष्टीकरण और वेतन रोकने जैसे कड़े कदम शामिल हो सकते हैं.

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