इंसानियत अभी जिंदा है: सड़क हादसे में घायल अनाथ जयप्रकाश को अस्पताल ने छोड़ा बेसहारा, अब समाजसेवी कराएंगे इलाज

झारखंड रांची

रांची: जब अपनों और सरकारी व्यवस्था दोनों ने साथ छोड़ दिया, तब गोंदलीपोखर के समाजसेवियों ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। मूल रूप से सोनाहातू निवासी 50 वर्षीय जयप्रकाश सिंह मुंडा, जो बचपन से ही अनाथ और बेसहारा हैं, करीब 15 दिन पहले एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका एक पैर बुरी तरह टूट गया था। ग्रामीणों ने उन्हें इलाज के लिए रिम्स (RIMS) भेजा, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने किसी सगे-संबंधी के न होने का हवाला देकर बिना ऑपरेशन किए उन्हें वापस लौटा दिया।

टूटे पैर और असहनीय दर्द के साथ गांव लौटे जयप्रकाश की सुध समाजसेवी रामपोदो महतो और नीलकंठ चौधरी ने ली। गुरुवार को उन्होंने जयप्रकाश का निजी अस्पताल में एक्स-रे कराया और उनके समुचित इलाज का बीड़ा उठाया। रामपोदो महतो ने बताया कि ऑपरेशन के विकल्प के साथ-साथ वे जयप्रकाश को बंगाल के एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक के पास भी ले जाएंगे, जो बिना ऑपरेशन हड्डियों के इलाज के लिए जाने जाते हैं। गोंदलीपोखर के ग्रामीणों ने जयप्रकाश को अपना परिवार मानकर यह साबित कर दिया कि समाज ही अंततः लाचारों का सहारा बनता है।

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