रांची की हाईप्रोफाइल चोरी में बड़ा खुलासा: 80 लाख की जगुआर कार से आए थे चोर, फर्जी आईडी पर होटल में रुके; बंगाल से लग्जरी कार बरामद

रांची

रांची. रांची के पॉश इलाके अशोक नगर स्थित त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन के मालिक अखिलेश पांडेय के घर हुई 98 लाख रुपये की हाई-प्रोफाइल चोरी के मामले में रांची पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हुए आरोपियों की करीब 80 लाख रुपये मूल्य की लग्जरी जगुआर (Jaguar) कार को पुलिस ने पश्चिम बंगाल के बरुइपुर से लावारिस हालत में बरामद कर लिया है. पुलिस वाहन को जब्त कर रांची ले आई है और चोरों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है.

जांच में यह बात सामने आई है कि चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम देकर भागने के दौरान आरोपियों की जगुआर कार एक अन्य वाहन से टकरा गई थी. सड़क हादसे के बाद मामला बढ़ता देख दोनों शातिर चोर लग्जरी कार को वहीं लावारिस छोड़कर मौके से फरार हो गए.

यूपी नंबर की जगुआर से आए थे चोर, फर्जी आईडी से होटल में किया था स्टे

पुलिस की अब तक की तफ्तीश में बेहद चौंकाने वाले और शातिराना तरीके का खुलासा हुआ है:

  • लग्जरी कार का इस्तेमाल: दोनों आरोपी 8 जुलाई की दोपहर करीब 80 लाख रुपये की जगुआर कार से रांची पहुंचे थे, जिस पर उत्तर प्रदेश (UP) की नंबर प्लेट लगी हुई थी.

  • फर्जी पहचान पत्र से कमरा: रांची पहुंचने के बाद दोनों आरोपियों ने जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के बिरसा चौक स्थित ‘हॉटेल पार्क रिट्रीट’ में एक कमरा बुक किया. होटल में अपनी पहचान छुपाने के लिए उन्होंने एक मुस्लिम व्यक्ति के नाम पर बने फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था.

  • लगातार कर रहे थे रेकी: होटल के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि रुकने के दौरान दोनों आरोपी कई बार बाहर निकले थे, जिसके दौरान उन्होंने घटना को अंजाम देने के लिए रेकी की थी.

करीब 98 लाख की संपत्ति पर किया था हाथ साफ

गौरतलब है कि चोरों ने कंस्ट्रक्शन कारोबारी अखिलेश पांडेय के घर से भारी मात्रा में कैश और जेवरातों की चोरी की थी. पीड़ित परिवार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, घर से करीब 8 लाख रुपये नकद (कैश) और लगभग 90 लाख रुपये मूल्य के सोने, हीरे, रूबी व चांदी के कीमती जेवरात चोरी हुए थे. इस बड़ी वारदात को लेकर अखिलेश पांडेय के पुत्र के बयान पर संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस का दावा है कि होटल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, फर्जी पहचान पत्र और तकनीकी साक्ष्यों (लोकेशन व इनपुट्स) के आधार पर आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

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