गढ़वा. गढ़वा जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को लेकर उपायुक्त (DC) ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक के दौरान डीसी ने विभिन्न शैक्षणिक संकेतकों (इंडिकेटर्स) की बिंदुवार समीक्षा की और कड़े लहजे में चेतावनी दी कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा. लक्ष्य के अनुरूप काम न करने और लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ डीसी ने नाराजगी जताते हुए तुरंत स्पष्टीकरण (शो-कॉज) जारी करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही, सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों (BEEO) और बीपीओ को दफ्तर छोड़कर अनिवार्य रूप से नियमित फील्ड निरीक्षण करने तथा बायोमेट्रिक प्रणाली के जरिए शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है.
अपार आईडी (APAAR ID) के लिए दोहरा नामांकन; प्राइवेट स्कूलों के खेल पर कसेगा शिकंजा
समीक्षा बैठक के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा और जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने जिले में चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े से उपायुक्त को अवगत कराया:
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दोहरा नामांकन (Double Enrollment): जिले में बिना यू-डाइस (U-DISE) कोड वाले कई निजी स्कूल, अपने बच्चों का डिजिटल स्टूडेंट पहचान पत्र यानी ‘आपार आईडी’ बनवाने के लिए उनका जबरन सरकारी स्कूलों में भी नामांकन करा देते हैं.
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रैंकिंग और योजनाओं को नुकसान: बच्चे वास्तव में निजी स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन उनका रिकॉर्ड सरकारी स्कूलों में दर्ज रहता है. इससे जिले का शैक्षणिक इंडिकेटर और रैंकिंग खराब हो रही है. साथ ही, सरकारी योजनाओं का लाभ असली हकदारों की जगह निजी स्कूल के बच्चे उठा रहे हैं.
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नाम काटने का निर्देश: डीसी ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि ऐसे बच्चों के अभिभावकों को आपार आईडी का महत्व समझाया जाए. यदि इसके बाद भी बच्चे सरकारी स्कूलों से लगातार अनुपस्थित रहते हैं, तो उनका नाम तुरंत काटने का प्रस्ताव भेजें.
‘Garhwa Learns, Garhwa Leads’ से सुधरेगी सरकारी स्कूलों की तस्वीर
जिले की शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक गतिविधियों में गुणात्मक व रचनात्मक सुधार लाने के लिए उपायुक्त द्वारा ‘गढ़वा लर्न्स, गढ़वा लीड्स’ नामक एक विशेष महत्वाकांक्षी कार्ययोजना की शुरुआत की गई है:
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स्पेशल टास्क फोर्स का गठन: ‘डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन इनोवेशन चैलेंज’ के तहत तैयार इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए जिला स्तर पर एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाई गई है.
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9 प्रमुख गतिविधियां: इसके अंतर्गत मिशन रेड अलर्ट, गढ़वा स्पीक्स, स्मार्ट क्लास फॉर ए स्मार्टर माइंड, परख, पीएम पोषण और ग्रीन स्कूल क्लीन स्कूल जैसी कुल 9 प्रमुख गतिविधियों पर विशेष फोकस किया जाएगा. इसका उद्देश्य बच्चों में मंच पर बोलने का आत्मविश्वास जगाना, उनकी झिझक दूर करना और स्कूलों से बच्चों के ड्रॉप-आउट (पढ़ाई बीच में छोड़ना) को रोकना है.
मध्याह्न भोजन की समीक्षा, बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूल होंगे जिला स्तर पर सम्मानित
बैठक में ‘पीएम-पोषण’ (मध्याह्न भोजन) योजना की भी गहन समीक्षा की गई. उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि हर हाल में सरकार द्वारा तय मेनू के अनुसार ही बच्चों को पोषक आहार और खाद्यान्न का वितरण सुनिश्चित किया जाए. इसमें किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर सीधे विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
इसके साथ ही, शिक्षा के प्रति सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए डीसी ने घोषणा की कि जिले के प्रत्येक प्रभाग में उत्कृष्ट व टॉप प्रदर्शन करने वाले सरकारी स्कूलों को जिला स्तर पर भव्य समारोह आयोजित कर सम्मानित किया जाएगा. इस महत्वपूर्ण बैठक में उप विकास आयुक्त (DDC) प्रेमलता मुर्मू, जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा, जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज सहित जिले के सभी बीईईओ, बीपीओ, बीपीएम, सीआरपी, विभिन्न स्कूलों के प्रधानाचार्य और शिक्षा विभाग के कनीय व सहायक अभियंता मुख्य रूप से उपस्थित थे.
