रांची. राजधानी रांची के सदर अस्पताल की सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग से लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है. मंगलवार (21 जुलाई 2026) की तड़के अहले सुबह करीब 4:00 बजे 10-पैसेंजर क्षमता वाली एक लिफ्ट अचानक तकनीकी खराबी के कारण बीच में ही बंद हो गई. इस वजह से नामकुम निवासी 28 वर्षीय छोटू महतो नाम का युवक लगभग दो घंटे तक अंधेरे में लिफ्ट के भीतर फंसा रहा. युवक अपनी परिजन रीता कुमारी (जो लेबर वार्ड में भर्ती थीं) के पास से नीचे आ रहा था, तभी यह हादसा हुआ.
लिफ्ट के अचानक रुकते ही भीतर अंधेरा छा गया. युवक ने फोन के जरिए मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन किसी से संपर्क नहीं हो सका. करीब एक घंटे तक युवक मदद के लिए चिल्लाता रहा, जिसके बाद वहां से गुजर रही एक सतर्क नर्स ने उसकी आवाज सुनी और अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी.
दो घंटे की मशक्कत के बाद निकला युवक, ड्यूटी पर नहीं था लिफ्टमैन
अस्पताल परिसर में उस समय हड़कंप मच गया जब लिफ्ट ऑपरेटर या किसी आपातकालीन स्टाफ का तत्काल कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला:
-
ड्यूटी से गायब था ऑपरेटर: प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों ने बताया कि इमरजेंसी नंबरों और लिफ्ट ऑपरेटर को कई बार फोन किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
-
टेक्नीशियन की मदद से रेस्क्यू: लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत और अफरा-तफरी के बाद सुबह करीब 6:00 बजे टेक्नीशियन व स्थानीय लोगों के सहयोग से युवक को सुरक्षित बाहर निकाला गया. युवक ने इस लापरवाही को लेकर अस्पताल प्रशासन को लिखित शिकायत दर्ज कराई है.
मेंटेनेंस में बड़ी गड़बड़ी, एसी कंपनी को दे दिया लिफ्ट का जिम्मा
घटना के बाद अस्पताल की लिफ्ट सुरक्षा और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की पोल खुल गई है:
-
सेंसर फेल्योर का आरोप: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लिफ्ट का सेंसर और ‘ऑटोमेटेड रेस्क्यू सिस्टम’ (ARS) काम नहीं कर रहा था.
-
अनुभवहीन कंपनी को ठेका: सदर अस्पताल में एयरकंडिशनिंग का काम देखने वाली कंपनी ‘मेसर्स सिद्धिविनायक’ को ही लिफ्ट मेंटेनेंस का जिम्मा सौंप दिया गया है, जबकि उसका इस क्षेत्र में अनुभव नहीं है. मेंटेनेंस के नाम पर कंपनी को हर महीने 2.5 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया जाता है.
500 बेड के अस्पताल में महज 3 लिफ्ट ऑपरेटर
500 बेड वाले इस विशाल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों और परिजनों की सुविधा के लिए 10 लिफ्ट (छह 10-पैसेंजर और चार 15-पैसेंजर क्षमता वाली) लगाई गई हैं. हालांकि, पूरे अस्पताल का संचालन केवल तीन लिफ्टमैन के भरोसे चल रहा है. आउटसोर्सिंग के जरिए बहाल किए गए अन्य लिफ्ट ऑपरेटरों को सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा अन्य कार्यों में लगा दिया गया है, जिससे अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था रामभरोसे चल रही है.
