गढ़वा. झारखंड के बोकारो और हजारीबाग जिलों में वेतन मद से हुई करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आने के बाद गढ़वा जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सरकारी राशि के गबन और वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए उपायुक्त अनन्य मित्तल के निर्देश पर शनिवार (25 अप्रैल 2026) को समाहरणालय सभागार में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
बोकारो-हजारीबाग कांड से लिया सबक:
हाल ही में राज्य के कुछ जिलों में पुलिस विभाग के वेतन मद से बड़ी राशि की अवैध निकासी का खुलासा हुआ था। इसी षड्यंत्र को ध्यान में रखते हुए वित्त विभाग, झारखंड के निर्देश पर गढ़वा में सभी निकासी और व्ययन पदाधिकारियों (DDO), प्रधान सहायकों और बिलिंग क्लर्कों को वित्तीय अनुशासन और सुरक्षा नियमों की बारीकियां समझाई गईं।
सजगता से रुकेगा वित्तीय गबन:
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बिलिंग प्रक्रिया के दौरान होने वाली तकनीकी या मानवीय चूकों को सुधारना है। उपायुक्त का मानना है कि यदि बिलिंग क्लर्क और प्रधान सहायक सजग रहेंगे, तो फर्जी निकासी की किसी भी कोशिश को शुरुआती स्तर पर ही नाकाम किया जा सकता है। उपायुक्त ने सभी संबंधित कर्मियों को इस प्रशिक्षण में भाग लेना अनिवार्य किया है।
चार सत्रों में चला प्रशिक्षण कार्यक्रम:
कार्यशाला सुबह 10:30 बजे से शुरू होकर दोपहर 3:00 बजे तक चार अलग-अलग सत्रों में आयोजित की गई:
| चरण | समय सीमा |
| पहला चरण | सुबह 10:30 – 11:30 बजे |
| दूसरा चरण | सुबह 11:45 – दोपहर 12:30 बजे |
| तीसरा चरण | दोपहर 1:00 – 1:45 बजे |
| चौथा चरण | दोपहर 2:15 – 3:00 बजे |
इस कार्यशाला के माध्यम से डिजिटल सिग्नेचर, बिल सत्यापन और पीएफएमएस (PFMS) प्रणाली की सुरक्षा को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की इस सक्रियता से जिले में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ने और सरकारी धन के दुरुपयोग पर लगाम लगने की उम्मीद है।
