ऐतिहासिक हार: लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण संशोधन बिल . 2014 के बाद पहली बार फेल हुआ कोई सरकारी विधेयक

नेशनल

नई दिल्ली . मोदी सरकार को शुक्रवार (17 अप्रैल) शाम लोकसभा में एक बड़े विधायी झटके का सामना करना पड़ा . सरकार द्वारा पेश ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026’ जरूरी दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पास नहीं हो सका . विशेष सत्र के दौरान हुई इस वोटिंग ने 2023 के महिला आरक्षण कानून को समय से पहले लागू करने की सरकार की कोशिशों पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है .

वोटिंग का गणित:

  • पक्ष में वोट: 298

  • विरोध में वोट: 230

  • कमी: बिल पास होने के लिए 352 (दो-तिहाई) वोटों की जरूरत थी, लेकिन यह 54 वोट पीछे रह गया .

सरकार ने वापस लिए दो अन्य बिल: इस महत्वपूर्ण बिल के गिरने के बाद सरकार ने इसके साथ पेश किए गए दो अन्य विधेयकों को भी वापस ले लिया है:

  1. परिसीमन (Delimitation) बिल 2026: जिसमें 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों के नए बंटवारे का प्रस्ताव था .

  2. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026: जो दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर विधानसभाओं से संबंधित था .

क्या था 131वें संशोधन का लक्ष्य? इस बिल के जरिए सरकार लोकसभा सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करना चाहती थी . साथ ही, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को अगली जनगणना का इंतजार किए बिना 2029 तक लागू करने का रास्ता साफ करना चाहती थी . वर्तमान कानून के अनुसार, आरक्षण तभी लागू होगा जब नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन पूरा हो जाए, जिसमें 2034 तक का समय लग सकता है .

विपक्ष का रुख और आगे की राह: पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासनों के बावजूद विपक्ष ने पुराने आंकड़ों (2011 जनगणना) पर परिसीमन का कड़ा विरोध किया . अब सरकार के पास 2023 का मूल कानून तो है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने के लिए परिसीमन अनिवार्य है . शनिवार (18 अप्रैल) को होने वाली कैबिनेट बैठक में सरकार 543 सीटों में से ही एक-तिहाई आरक्षण देने जैसे नए विकल्पों पर विचार कर सकती है .

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