पश्चिमी सिंहभूम. झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत कोटगढ़ स्थित मनरेगा सहायता केंद्र में शुक्रवार (24 अप्रैल 2026) को एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA, चाईबासा) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “पेरालीगल कानूनी कार्रवाई एवं सहायता” था, जिसमें महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सशक्त बनाया गया।
महत्वपूर्ण कानूनों की दी गई जानकारी: पीएलवी मदन निषाद ने महिलाओं को सरल भाषा में विभिन्न सुरक्षा कानूनों से अवगत कराया:
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सुरक्षा कानून: दहेज प्रतिषेध अधिनियम, घरेलू हिंसा अधिनियम और कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (POSH) कानून के बारे में विस्तार से बताया गया।
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बाल विवाह पर रोक: उन्होंने बताया कि बाल विवाह रोकने के लिए प्रखंड स्तर पर BDO और पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
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हेल्पलाइन नंबर्स: महिलाओं को टोल-फ्री हेल्पलाइन 15100, पुलिस सहायता नंबर 100/112 और Zero FIR की सुविधा के बारे में जानकारी दी गई।
सामाजिक कुरीतियों और डिजिटल सुरक्षा पर मंथन: पीएलवी प्रमिला महापात्रो ने डायन प्रथा (विच हंटिंग), यौन उत्पीड़न और सामाजिक रूप से वंचित महिलाओं की सहायता के लिए संस्था की भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही, आज के दौर में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड से बचने के उपायों पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया।
सशक्तिकरण में सहयोग केंद्रों की भूमिका: सपोर्ट संस्था की जेंडर ब्लॉक कोऑर्डिनेटर पूजा सिंहदेव ने बताया कि ‘मेट फोरम’ और ‘सहयोग केंद्र’ किस प्रकार महिलाओं को सरकारी योजनाओं, आजीविका और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने का सेतु बन रहे हैं।
सामूहिक संकल्प: प्रशिक्षण के अंत में उपस्थित महिलाओं और 31 महिला मेटों ने समाज से बाल विवाह जैसी कुरीति को जड़ से खत्म करने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और कानूनी पेचीदगियों पर सवाल भी पूछे, जिससे यह सत्र काफी प्रभावी रहा।
