तमिलनाडु में ‘दोस्ती’ पर भारी ‘सियासत’: कांग्रेस-TVK के करीब आने से गठबंधन में दरार; DMK ने याद दिलाया स्टालिन का ‘राहुल प्रेम’

नेशनल

चेन्नई. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को कांग्रेस द्वारा समर्थन देने की खबरों ने सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) को नाराज कर दिया है. डीएमके प्रवक्ता सर्वानन अन्नादुरई ने कांग्रेस के इस रुख को ‘पीठ में छुरा घोंपने’ जैसा करार दिया है.

DMK की नाराजगी के मुख्य बिंदु

  • जनादेश का अपमान. अन्नादुरई ने कहा कि कांग्रेस का यह फैसला तमिलनाडु की जनता और उनके जनादेश के साथ सरासर धोखा है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह गठबंधन चुनाव प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही पर्दे के पीछे तय कर लिया गया था.

  • पुराना साथ भूली कांग्रेस. डीएमके नेता ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने ही राहुल गांधी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया था और हर मुश्किल समय में कांग्रेस का साथ दिया. उन्होंने हैरानी जताई कि जीत के सर्टिफिकेट की स्याही सूखने से पहले ही कांग्रेस ने पाला बदल लिया.

  • गठबंधन का गणित. अन्नादुरई ने सवाल उठाया कि कांग्रेस के महज 5 विधायकों के समर्थन से क्या होगा, जबकि TVK को बहुमत के लिए 11 से 12 विधायकों की जरूरत है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सिर्फ मंत्रिमंडल में 2 सीटों के लालच में अपना भविष्य दांव पर लगा रही है.

AIADMK के समर्थन पर तंज

डीएमके ने अन्नाद्रमुक (AIADMK) द्वारा भी TVK को समर्थन देने की चर्चाओं पर तंज कसा. अन्नादुरई ने पूछा कि क्या TVK 47 विधायकों वाली AIADMK को छोड़कर 5 विधायकों वाली कांग्रेस का हाथ थामेगी? उन्होंने कहा कि इस तरह के अवसरवादी फैसले देशहित में नहीं हैं.

बता दें कि 2026 के नतीजों में विजय की पार्टी TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत के आंकड़े (118) से वह 10 सीटें दूर है. ऐसे में कांग्रेस के 5 विधायक किंगमेकर की भूमिका में आने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे डीएमके के साथ उनका दशकों पुराना गठबंधन टूटने की कगार पर है.

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