कोडरमा: कोडरमा वन प्रमंडल इन दिनों दोहरी चुनौती से जूझ रहा है। एक तरफ जंगली हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने की जद्दोजहद जारी है, वहीं दूसरी ओर महुआ चुनने के लिए ग्रामीणों द्वारा जंगल में आग लगाने की घटनाएं विभाग की परेशानी बढ़ा रही हैं। पिछले ढाई महीनों में वन अग्नि की 34 घटनाएं दर्ज की गई हैं। ग्रामीण महुआ के पेड़ के नीचे जमीन साफ करने के लिए सूखी पत्तियों में आग लगा देते हैं, जो देखते ही देखते पूरे जंगल में फैल जाती है।
इस समस्या से निपटने के लिए वन प्रमंडल पदाधिकारी सौमित्र शुक्ला के नेतृत्व में पहली बार ‘महुआ मैपिंग’ की गई है। इसके तहत उन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है जहाँ महुआ के पेड़ों की संख्या अधिक है। विभाग ने एक अनोखी पहल करते हुए चंदवारा के बेंदी जैसे इलाकों में ग्रामीणों के बीच झाड़ू का वितरण किया है, ताकि वे आग लगाने के बजाय झाड़ू लगाकर जमीन साफ करें। विभाग के इन प्रयासों और जागरूकता अभियानों के कारण पिछले वर्ष की तुलना में आग की घटनाओं में कमी आई है। डीएफओ ने अपील की है कि ग्रामीण अपनी अर्थव्यवस्था के लिए महुआ जरूर चुनें, लेकिन पर्यावरण की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।
