जमशेदपुर. जमशेदपुर के परसुडीह स्थित तुपुडांग गांव में बुधवार को चड़क पूजा के अवसर पर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम दिखा। यहाँ 144 साल पुरानी ‘रजनी फोड़ा’ परंपरा का निर्वहन करते हुए भक्तों ने रोंगटे खड़े कर देने वाले करतब दिखाए।
पीठ में कील घोंपकर हवा में झूलते भक्त:
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कठिन साधना: मिथुन लोहार और महेश लोहार जैसे ‘भोक्ताओं’ ने अपनी पीठ में लोहे की नुकीली कीलें (हुक) चुभवाईं।
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50 फीट की ऊंचाई: भक्तों को करीब 50 फीट ऊंचे लकड़ी के खंभे से बांधकर हवा में लटकाया गया और तीन चक्कर घुमाया गया।
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बिना दवा के ठीक होता है घाव: भोक्ता महेश लोहार ने बताया कि कील निकालने के बाद वे किसी दवा का नहीं, बल्कि मंदिर के सिंदूर का उपयोग करते हैं, जिससे 10-12 दिनों में घाव भर जाता है।
कोल्हान से उमड़ा जनसैलाब:
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मुख्य अतिथि: पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने भी पूजा में शिरकत की और इसे क्षेत्र की अटूट आस्था का प्रतीक बताया।
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मन्नतें: चड़क मेले में कोल्हान के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। कई भक्त तपती दोपहर में जमीन पर लोटते हुए मंदिर पहुंचे और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
