नोआमुंडी. झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के नोआमुंडी प्रखंड स्थित ईटर बालजोडी (रोबेंटा) गांव में मंगलवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर स्थानीय रैयतों और ग्रामीण दिऊरी ने एकजुट होकर न केवल बाबा साहेब को नमन किया, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए ‘पथलगढ़ी’ कार्यक्रम का भी आयोजन किया।
पथलगढ़ी के जरिए दिया कड़ा संदेश
अंबेडकर जयंती के मौके पर ग्रामीणों ने गांव की सीमाओं पर पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ पथलगढ़ी की। इसके माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना जल, जंगल और जमीन पर किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप या पूंजीपतियों का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
CNT एक्ट और जमीन की सुरक्षा पर सामूहिक निर्णय
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों पर विस्तार से चर्चा हुई। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से निम्नलिखित निर्णय लिए:
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लूट का विरोध: पूंजीपतियों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और जमीन की लूट का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
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CNT एक्ट का पालन: सीएनटी एक्ट (CNT Act) के तहत आने वाली जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया।
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एकजुटता: ग्रामीणों ने कहा कि बाबा साहेब ने जो अधिकार दिए हैं, उनकी रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष जारी रखा जाएगा।
अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प
इस अवसर पर भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। वक्ताओं ने कहा कि पथलगढ़ी केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वशासन और जमीन पर उनके मालिकाना हक का प्रतीक है। जब तक ग्रामीण संगठित रहेंगे, तब तक उनकी पहचान और अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
